पाकिस्तान को मिला सऊदी-तुर्की का साथ, भारत के लिए बढ़ी चुनौती? खाड़ी में बदल रहा पूरा खेल

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच रक्षा सहयोग ने दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की रणनीतिक तस्वीर को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अगस्त में सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्की के साथ रक्षा समझौता किया था। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब ईरान को लेकर क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ है और पश्चिम एशिया में सुरक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
भारत के लिए इस घटनाक्रम का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि पाकिस्तान पहले से ही भारत के साथ गंभीर सुरक्षा और कूटनीतिक तनाव में है। पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब और तुर्की के बढ़ते रक्षा सहयोग से भारत के रणनीतिक हलकों में इस नए समीकरण पर नजर स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है।
Le Monde ने इस रक्षा समझौते को भारत के लिए कमजोर करने वाले घटनाक्रम के रूप में विश्लेषित किया है। रिपोर्ट में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच बने इस सुरक्षा समीकरण के क्षेत्रीय प्रभाव पर चर्चा की गई है।
इस गठजोड़ का एक महत्वपूर्ण पहलू पश्चिम एशिया की मौजूदा अस्थिरता है। सऊदी अरब खुद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर दबाव का सामना कर रहा है। इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरामको की जिजान रिफाइनरी पर हमला किया था। Reuters के अनुसार यह हमला सऊदी अरब द्वारा तुर्की और पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने के कुछ ही दिन बाद हुआ।
भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है। यहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है। इसलिए पश्चिम एशिया में बनने वाला कोई भी नया सैन्य समीकरण नई दिल्ली के लिए रणनीतिक महत्व रखता है।
अब सवाल यह है कि पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की की बढ़ती नजदीकी भविष्य में किस दिशा में जाती है और भारत इसका जवाब अपने कूटनीतिक तथा रणनीतिक संतुलन के जरिए कैसे देता है।
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