CBSE की तीन भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट में घमासान! बच्चों पर दबाव नहीं, लेकिन लागू करने का तरीका अब भी उलझा

CBSE की तीन भाषा नीति को लेकर बहस तेज है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि नीति लागू करने के तौर-तरीकों पर काम चल रहा है। कोर्ट ने भी साफ किया है कि बच्चों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ना चाहिए।
केंद्र सरकार ने 4 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि CBSE की उस नीति को लागू करने के लिए सुझावों और व्यवस्थाओं पर काम किया जा रहा है, जिसके तहत कक्षा 9 के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी हैं और इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी।
मामले की सुनवाई के दौरान सवाल केवल नीति के पक्ष या विरोध का नहीं रहा, बल्कि उसके लागू करने के तरीके का बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कहा था कि बच्चों पर दबाव नहीं पड़ना चाहिए और नीति को लागू करने में आने वाली बाधाओं का समाधान तलाशना जरूरी है।
CBSE के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है। विदेशी भाषा चुनने वाले छात्रों को भी पहले दो भारतीय भाषाओं की शर्त का पालन करना होगा या विदेशी भाषा को अतिरिक्त विकल्प के रूप में लेना होगा।
सबसे बड़ा सवाल स्कूलों की तैयारी को लेकर है। पर्याप्त शिक्षक, अलग-अलग भाषा विकल्प और शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं—अब बहस इसी पर केंद्रित है।
तीन भाषा नीति का विवाद अब “भाषा पढ़ाई जाए या नहीं” से आगे बढ़कर “क्या शिक्षा व्यवस्था इसे लागू करने के लिए तैयार है?” तक पहुंच गया है। आने वाले दिनों में सरकार की कार्ययोजना इस बहस का केंद्र होगी।
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