35 किलो चावल ने घटाई राशन की चिंता, बचत से पूरा हुआ मोटरसाइकिल का सपना

कभी महीने का राशन जुटाना अनीता दांडेकर के परिवार के लिए बड़ी चिंता हुआ करता था। सीमित आमदनी में घर का खर्च चलाने के साथ दो वक्त के भोजन की व्यवस्था सबसे पहली प्राथमिकता होती थी। ऐसे समय में मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के तहत हर महीने मिलने वाले 35 किलो निःशुल्क चावल ने परिवार को बड़ी राहत दी।
बलौदाबाजार जिले के भाटापारा के गुरुनानक वार्ड में रहने वाली अनीता बताती हैं कि अब हर महीने राशन के लिए अलग से रकम जुटाने का दबाव नहीं रहता। 35 किलो चावल मिलने से परिवार के भोजन का एक बड़ा हिस्सा आसानी से पूरा हो जाता है।
कोविड के मुश्किल दौर में भी जब रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना चुनौती बन गया था, तब अनीता के परिवार को राशन मिलता रहा। इस सहायता ने कठिन समय में उनके परिवार को खाद्य सुरक्षा का भरोसा दिया।
राशन की चिंता कम होने के बाद परिवार ने धीरे-धीरे छोटी-छोटी बचत शुरू की। समय के साथ यही बचत बढ़ती गई और आखिरकार परिवार अपने लिए मोटरसाइकिल खरीदने में सफल रहा। आज यह मोटरसाइकिल उनके रोजमर्रा के आवागमन को आसान बना रही है।
अनीता के लिए यह मोटरसाइकिल महज एक वाहन नहीं, बल्कि उस आर्थिक राहत और बचत की कहानी है, जिसकी शुरुआत हर महीने मिलने वाले 35 किलो चावल से हुई। उनका कहना है कि भोजन की चिंता कम होने से परिवार को अपने दूसरे जरूरी सपनों के बारे में सोचने और उन्हें पूरा करने का अवसर मिला।




