छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए नई पहल: जलवायु बदलाव के बीच फसल विविधीकरण से बढ़ेगी आमदनी!

रायपुर। छत्तीसगढ़ में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण पर आधारित नया पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इस पहल के तहत किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ ऐसी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जाएगा, जिनकी बाजार में बेहतर मांग और अधिक कीमत मिल सके।
मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में कृषि विशेषज्ञों और अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्ण कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) के वैज्ञानिकों के साथ उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों से किसानों के खेतों तक पहुंचकर उन्हें उन्नत किस्मों और अधिक लाभ देने वाली फसलों के बारे में जानकारी देने के निर्देश दिए।
अधिकारियों के मुताबिक, इसी तरह की परियोजना ओडिशा में संचालित की जा रही है। अब इसके अनुभवों के आधार पर छत्तीसगढ़ में भी इसे लागू किया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य बदलती जलवायु के अनुरूप फसल प्रणाली विकसित करना, पुनरुत्थान कृषि को बढ़ावा देना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।
यह परियोजना पांच साल की अवधि के लिए प्रस्तावित है और इसे क्लस्टर आधारित चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। आगामी फसल मौसम से प्रयोग शुरू करने के लिए जल्द ही विस्तृत बेसलाइन सर्वे कराया जाएगा।
परियोजना के तहत कृषि विकास, किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग और ICRISAT के बीच जेनेरिक एमओयू किया जाएगा। मैदानी अमले के क्षमता विकास, तकनीकी मार्गदर्शन और किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने में समेति का सहयोग लिया जाएगा। साथ ही किसानों के उत्पादों की बिक्री के लिए मजबूत मार्केट लिंकेज विकसित करने पर भी जोर रहेगा।
बैठक में ICRISAT वैज्ञानिक डॉ. गजानंद स्वर्गाैनकर ने परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया। इस दौरान डॉ. रोहन खोपड़े, डॉ. जी.के. चौधरी, डॉ. सी.एल. जैन, बी.के. बिजरोनिया और उमेश सिंह तोमर सहित कृषि विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।



