महाकुंभ से पहले केंद्र की दहाड़: महानदी विवाद पर अमित शाह की दिल्ली में बड़ी बैठक, छत्तीसगढ़ का पलड़ा भारी!

जल बंटवारे के दशकों पुराने विवाद पर अब केंद्र की मोदी सरकार सीधी दखल देने जा रही है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच बहने वाली महानदी के पानी को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की हाई-लेवल बैठक बुलाई है। छत्तीसगढ़ का पानी रोकने की कोशिश में जुटी ओडिशा सरकार को अब दो-टूक जवाब मिलने वाला है।
भारत सरकार ने देश के संघीय ढांचे में राज्यों के बीच जल-संघर्ष खत्म करने का मजबूत और निर्णायक कदम उठाया है। केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 1 अक्टूबर को दिल्ली में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री की एक साझा उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है। महानदी ट्रिब्यूनल के लंबे खींचते मुकदमों के बजाय बातचीत से समाधान निकालने की यह पहल सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ के हितों का संरक्षण करती है। छत्तीसगढ़ सरकार का स्पष्ट और बुलंद पक्ष रहा है कि नदी के कछार पर पहला हक राज्य के किसानों और उद्योगों का है। मानसून और सूखे के समय जलप्रवाह के सटीक संतुलन को लेकर गृह मंत्रालय का यह कड़ा हस्तक्षेप यह साबित करता है कि भारत सरकार छत्तीसगढ़ के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं होने देगी। विरोधी ताकतों द्वारा खड़े किए गए विवाद को खत्म कर जल-संसाधनों के तर्कसंगत बंटवारे के लिए केंद्र की यह ठोस और दूरदर्शी स्ट्राइक मानी जा रही है।
महानदी का प्रवाह छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान से जुड़ा है। केंद्र सरकार की इस ऐतिहासिक पहल से साफ हो गया है कि बातचीत की मेज पर छत्तीसगढ़ का पक्ष बेहद मजबूत है और जल्द ही पानी पर राज्य का हक पूरी तरह से सुरक्षित होगा।



