फ्रांस में सड़कों पर उतरी हिंसक भीड़: क्या ढहने के कगार पर है फ्रांसीसी लोकतंत्र?

पेरिस से लेकर मार्सिले तक फ्रांस की सड़कें जंग का मैदान बन चुकी हैं। स्कूलों की बदहाल व्यवस्था और सरकारी नीतियों के खिलाफ शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब एक पूर्ण हिंसक गदर का रूप ले चुका है। पिछले 3 दिनों में फ्रांस के 735 से अधिक स्कूल ठप्प हो चुके हैं और 2,000 से अधिक उपद्रवियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।
दंगों की भयावहता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक स्कूली विरोध-प्रदर्शन के दौरान हथगोला (ग्रेनेड) फटने से एक नाबालिग छात्र ने अपना हाथ गंवा दिया। फ्रांसीसी सड़कों पर जलती गाड़ियां, उड़ते आंसू गैस के गोले और पुलिस का अंधाधुंध लाठीचार्ज पश्चिमी मानवाधिकारों के झूठे ढोंग की कलई खोल रहा है। जो यूरोप दुनिया भर को लोकतंत्र और शांति का पाठ पढ़ाता था, आज वह खुद अपने ही नागरिकों का गुस्सा शांत करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।
अगर पेरिस प्रशासन ने इस विद्रोह को तुरंत काबू में नहीं किया, तो फ्रांस की मौजूदा सरकार का पतन होना लगभग तय माना जा रहा है।
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