होर्मुज की खाड़ी में बारूद की गंध: क्या अमेरिका-ईरान जंग से दुनिया में मचने वाली है तबाही?

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब 8वें महीने में प्रवेश कर चुकी है और हालात इतने खौफनाक हो चुके हैं कि तीसरे अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और 10,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का आदेश दे दिया गया है। ईरान के संसद अध्यक्ष ने साफ लफ्ज़ों में कह दिया है कि जब तक उनकी शर्तें पूरी नहीं होंगी, तब तक दुनिया के सबसे रणनीतिक तेल मार्ग ‘होर्मुज की खाड़ी’ को खोला ही नहीं जाएगा।
ईरान की इस सीधी नाकेबंदी से पूरे यूरोप और अमेरिका में तेल की हाहाकार मच गई है। स्थिति को संभालने के लिए G7 देशों को आपातकालीन बैठक बुलाकर 100 मिलियन बैरल आपातकालीन क्रूड ऑयल रिलीज़ करने की घोषणा करनी पड़ी है। इस वैश्विक तबाही के बीच, भारत अपनी मजबूत और स्वतंत्र विदेश नीति के दम पर बिना किसी दबाव में आए अपने ऊर्जा हितों की सुरक्षा कर रहा है। जहाँ पश्चिमी देश मंदी के मुहाने पर खड़े हैं, वहीं नई दिल्ली की चतुर रणनीति ने भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव को हिलाने नहीं दिया है।
सुपरपावर्स की इस खूनी लड़ाई ने पूरी दुनिया के सामने ईंधन का संकट खड़ा कर दिया है। अगर होर्मुज का ताला जल्द नहीं खुला तो पश्चिमी देशों की आर्थिक कमर टूटना तय है।
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