नई दिल्ली: इंडिया अलायंस (INDIA Alliance) के मंच से विपक्ष के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया, संस्थागत स्वायत्तता और संवैधानिक मर्यादाओं को लेकर पीएम मोदी को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करते हुए दावा किया कि “प्रधानमंत्री कानून और संविधान से ऊपर नहीं हैं।”
विपक्षी दलों के बड़े नेताओं—अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और फारूक अब्दुल्ला—की मौजूदगी में आयोजित महारैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक दल की नहीं, बल्कि देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने की जन-आवाज बन चुकी है।
‘संविधान आपसे बड़ा है, कोई भाग नहीं सकता’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि सत्ता कितनी भी ताकतवर हो, वह संविधान से बड़ी नहीं हो सकती।
“आप अपने आप को जितना भी बड़ा समझो, जितना भी आपके पास पैसा और पावर है, आप जो भी हो—आप संविधान से बड़े नहीं हो। संविधान आपसे बड़ा है।”
अमित शाह के हालिया बयानों पर पलटवार करते हुए राहुल गांधी ने कहा:“अमित शाह कहते हैं कि नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जा रहे। मैं कहता हूं कि नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जा सकते। अगर जाना भी चाहेंगे, तो देश उन्हें जाने नहीं देगा। भागने की मत सोचिए, आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी और देश को न्याय मिलकर रहेगा।”
मुख्य आरोप: चुनावी निष्पक्षता और संस्थाओं पर हमला
राहुल गांधी के भाषण के केंद्र में प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर मुद्दे रहे:
- चुनाव आयोग और नतीजों पर सवाल: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ (15%) मतदाताओं के नाम हटा दिए गए, जबकि एनडीए और विपक्ष के बीच केवल 3% मतों का अंतर था। उन्होंने इसे सीधे तौर पर चुनावी धोखाधड़ी करार दिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गंभीर कदम उठाने की मांग की।
- संस्थाओं के नियंत्रण का आरोप: उन्होंने कहा कि सीबीआई, ईडी, न्यायपालिका, नौकरशाही और शिक्षा प्रणाली जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं का इस्तेमाल लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।
- दो-तीन उद्योगपतियों के लिए नीतियां: प्रधानमंत्री पर तीखा तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि देश की सारी संपत्ति और बुनियादी ढांचा (हवाई अड्डे, बिजली, रेलवे) चुनिंदा उद्योगपतियों, खासकर अडानी समूह के हाथों में सौंपा जा रहा है, जबकि आम किसान, मजदूर और छात्र रोजगार व राहत के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
‘नफरत नहीं, कानून और संविधान से मुकाबला करेंगे’

अपने भाषण में राहुल गांधी ने यह भी रेखांकित किया कि उनका विरोध व्यक्तिगत द्वेष या नफरत पर आधारित नहीं है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दल हिंसा या नफरत की राजनीति में यकीन नहीं रखते:“हम न तो नरेंद्र मोदी से नफरत करते हैं, न अमित शाह से। हम मोहब्बत की दुकान खोलने वाले लोग हैं। वे हमारे व्यक्तिगत दुश्मन नहीं हैं, लेकिन उन्होंने देश के संविधान, लोकतंत्र और आत्मा पर हमला किया है जिसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
अंत में उन्होंने रैली को देश की जनता, युवाओं और आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज बताते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए यह संघर्ष जारी रहेगा।










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