छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के मंच पर विवाद: वायुसेना का शौर्य बनाम बुनियादी समस्याओं की अनदेखी पर भड़का विपक्ष

chhattisgarh-rajyotsav-2026-controversy-air-force-sarang-show
आर्टिकल अच्छा लगे तो शेयर करें

1 नवंबर 2026 को नया रायपुर के मैदान में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव की चमक-धमक और वायुसेना की सारंग टीम का हवाई करतब हर किसी को हैरान कर रहा था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और शासन के तमाम बड़े चेहरों ने इस आयोजन को छत्तीसगढ़िया अस्मिता का प्रतीक करार दिया। लेकिन इसी भव्यता की आड़ में प्रदेश का सियासी पारा उबल पड़ा है। विपक्ष और स्थानीय संगठनों ने सीधे तौर पर सत्ता पक्ष पर हमला बोलते हुए इस पूरे आयोजन को जनता के खून-पसीने की कमाई की सरासर बर्बादी करार दिया है।

एक तरफ जहां नया रायपुर के नीले आसमान में लड़ाकू विमान गोते लगा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ सरगुजा और बस्तर के अंदरूनी इलाकों में डॉक्टरों की कमी, जर्जर सड़कों और बस्तर के अंदरूनी क्षेत्रों में बिजली-पानी की किल्लत को लेकर सरकार के खिलाफ तीखा आक्रोश भड़क उठा। जनसंगठनों ने सवाल उठाया कि जब राज्य का किसान फसल के दाम और बिजली संकट से जूझ रहा है, तब करोड़ों रुपये महज 3 दिनों के इस तमाशे पर फूंकने का क्या तुक है? नया रायपुर की सड़कों पर विरोध जताने पहुंचे युवाओं को पुलिस ने बलपूर्वक खदेड़ दिया, जिससे विवाद और गहरा गया है।

ये खबर भी पढ़ें —: छत्तीसगढ़ में आज से कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले या अधूरा रह गया इंतजार? DA-DR बढ़कर 60 प्रतिशत, अब एरियर्स पर सरकार से सवाल

नया रायपुर में जहां मुख्य मंच से प्रदेश के 26 सालों के सफर के तरक्की के बड़े-बड़े दावे दागे जा रहे थे, ठीक उसी वक्त कार्यक्रम स्थल के बाहर कुछ दूर पर आउटसोर्सिंग कर्मचारी और संविदा स्वास्थ्य कर्मी अपनी मांगों को लेकर समानांतर प्रदर्शन करने पर आमादा थे। सुरक्षा एजेंसियों के हाथ-पांव तब फूल गए जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने मंच के करीब जाने की कोशिश की। सरकारी अमला भले ही राज्योत्सव की सफलता के कसीदे पढ़ रहा हो, लेकिन सड़कों पर उठती विरोध की चिंगारी ने इस जश्न के रंग में भंग डाल दिया है। सरकारी संसाधनों के दम पर खींची गई खुशहाली की यह लकीर अब तीखी बहसों का शिकार बन चुकी है।

विपक्ष ने सीधे तौर पर तंज कसते हुए कहा है कि राज्योत्सव के नाम पर सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट हो रहा है, जबकि जमीनी हकीकत पर छत्तीसगढ़ की जनता बुनियादी सुविधाओं के तरस रही है। वहीं सत्ता पक्ष इसे छत्तीसगढ़ के गौरव और स्वाभिमान का प्रतीक बताकर विपक्ष पर विकास विरोधी होने का ठप्पा लगा रहा है। जश्न की आतिशबाजी खत्म होने के बाद उठने वाला यह सियासी धुंआ आने वाले दिनों में और तीखा होने वाला है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *