छत्तीसगढ़ के धमतरी में आयोजित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के दौरान उस वक्त सियासी असहजता की स्थिति बन गई, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर मंच पर जाने के बजाय दर्शक दीर्घा में कार्यकर्ताओं के बीच बैठ गए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता होने के बावजूद उन्होंने मंच से दूरी बनाए रखी।
तीन बार बुलावे के बाद भी मंच पर नहीं गए, मंत्री खुद नीचे उतरे

पदयात्रा के बाद आयोजित विशाल जनसभा में मंच से अजय चंद्राकर को तीन बार औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया। इसके बावजूद वे मंच पर नहीं पहुंचे। स्थिति को देखते हुए कार्यक्रम में मौजूद कैबिनेट मंत्री और जिला प्रभारी मंत्री टंक राम वर्मा स्वयं मंच से नीचे उतरे, उनसे हाथ मिलाया और मंच पर चलने का आग्रह किया। हालांकि, चंद्राकर अपनी जगह पर ही डटे रहे।
नाराजगी की वजह: ‘विधायक की अंत्येष्टि भी नहीं हुई और यहां स्वागत हो रहा है’
चंद्राकर ने अपनी नाराजगी की सीधी वजह मंच पर चल रहे स्वागत-सत्कार के तौर-तरीकों को बताया। उन्होंने दो टूक कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और अहिवारा विधायक राजमहंत डोमनलाल कोरसेवाड़ा का निधन हुआ है। अभी तक उनकी अंत्येष्टि भी संपन्न नहीं हुई है, ऐसे शोक के समय में मंच पर नेताओं का माल्यार्पण और स्वागत कार्यक्रम आयोजित करना कतई उचित और मर्यादित नहीं है।
इसके बाद उन्होंने नीचे से ही अपना संक्षिप्त संबोधन दिया और कार्यक्रम स्थल से रवाना हो गए। वहीं, मामले पर प्रभारी मंत्री टंक राम वर्मा ने किसी भी प्रकार की गुटबाजी या नाराजगी से इनकार करते हुए कहा कि पार्टी के सभी नेता पूरी तरह समर्पित और कर्मठ हैं।
बेबाक बयानों और तेवरों के लिए जाने जाते हैं चंद्राकर: कब-कब चर्चा में रही नाराजगी
कुरुद विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री अजय चंद्राकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपनी बेबाकी, आक्रामक शैली और तल्ख बयानों के लिए जाने जाते हैं:
मंत्रिमंडल गठन और उपेक्षा की चर्चाएं (2023-24): छत्तीसगढ़ में भाजपा की सत्ता में वापसी के बाद जब वरिष्ठ नेताओं के बजाय नए चेहरों को मंत्रिमंडल में प्राथमिकता दी गई, तब वरिष्ठ विधायकों की नाराजगी की खबरें सुर्खियों में रहीं। चंद्राकर ने सदन और संगठन के फैसलों पर कई मौकों पर चुटीले व तल्ख लहजे में अपनी बात रखी।
सदन में अपनी ही व्यवस्थाओं पर सवाल: विधानसभा में संसदीय कार्यप्रणाली के गहरे जानकार माने जाने वाले चंद्राकर कई बार नौकरशाही और प्रशासनिक ढिलाई को लेकर मुखर रहे हैं। वे विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस सरकार पर जितने हमलावर थे, सत्ता में रहने के दौरान भी अफसरशाही की कार्यशैली पर सवाल उठाने से पीछे नहीं हटे।
पार्टी के भीतर अनुशासन और परंपरा का मुद्दा: चंद्राकर हमेशा से संगठन के पारंपरिक प्रोटोकॉल और अनुशासन के पैरोकार रहे हैं। जब भी कार्यक्रमों में तय मर्यादा या प्रोटोकॉल की अनदेखी हुई, उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर भी अपनी असहमति दर्ज कराई।
धमतरी की ताजा घटना: शोक की स्थिति में राजनीतिक उत्सव जैसा माहौल बनाने और स्वागत सत्कार करने पर खुला विरोध दर्ज कराकर उन्होंने एक बार फिर यह संदेश दिया कि वे नियमों और मर्यादाओं से समझौता नहीं करते।
धमतरी के इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि चंद्राकर का यह कदम केवल तात्कालिक नाराजगी था या फिर संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर दिया गया कोई गहरा संदेश।













Leave a Reply