रायपुर। किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान, रायपुर में ‘खेत बचाओ अभियान-रबी 2026’ के तहत किसान जागरूकता एवं उन्नत सरसों बीज वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान किसानों को सरसों की उन्नत किस्म DRMR-150-35 के बीज वितरित किए गए। इससे लगभग 270 एकड़ क्षेत्र में सरसों की खेती को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेतों की उर्वरता बनाए रखना, मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करना और प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करना अभियान का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने किसानों से फसल अवशेषों का वैज्ञानिक प्रबंधन करने, संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि दलहनी और तिलहनी फसलों को बढ़ावा देकर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
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संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. पंकज शर्मा ने धान की कटाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेषों के प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को पराली जलाने के बजाय मल्चर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों से अवशेषों को छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में मिलाने की सलाह दी। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है और भूमि की उर्वरता बनी रहती है।
उन्होंने सरसों की खेती को किसानों के लिए बेहतर विकल्प बताते हुए कहा कि यह कम बीज और सीमित सिंचाई में भी अच्छी पैदावार देने वाली फसल है। सरसों की उन्नत किस्म DRMR-150-35 लगभग 95 से 110 दिनों में तैयार हो जाती है। वैज्ञानिक तरीके से खेती और समय पर बुवाई करने पर 10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन मिल सकता है। उन्होंने विशेष रूप से 30 नवंबर से पहले बुवाई करने की सलाह दी।
कार्यक्रम के तहत अनुसूचित जाति एवं जनजातीय उपयोजना के लाभार्थी किसानों को लगभग 270 एकड़ में बुवाई के लिए उन्नत सरसों बीज वितरित किए गए। किसानों ने इस पहल पर खुशी जताते हुए कहा कि बेहतर गुणवत्ता वाले बीज मिलने से उन्हें सरसों की खेती अपनाने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष किसानों के साथ जनप्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. के. सी. शर्मा और डॉ. प्रियंका मीना ने किया।














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