बुजुर्ग मां को घर से निकालने के मामले में महिला आयोग अध्यक्ष ममता साहू ने वकील बेटे को फोन पर लगाई फटकार, बोलीं- ‘मैं तुम्हारी यार नहीं हूं’

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रायपुर, 29 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसमें बुजुर्ग मां को घर से निकालने की शिकायत लेकर एक युवती अपनी मां के साथ आयोग पहुंची। मामले में आरोपित पक्ष युवती का अपना भाई है, जो पेशे से वकील बताया गया है। सुनवाई के दौरान जब वह उपस्थित नहीं हुआ तो महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने उससे फोन पर बात की। इस बातचीत में मामले को समझने और बात करने के लहजे को लेकर दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई।

फोन पर बातचीत के दौरान युवक ने अध्यक्ष से कहा कि वह पूरे मामले को नहीं समझ पा रही हैं। इसी दौरान उसने अध्यक्ष को ‘यार’ कहकर संबोधित किया। इस पर डॉ. ममता साहू ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि युवक वकालत कर रहा है तो वह भी एलएलएम और पीएचडी हैं। उन्होंने युवक को संबोधित करते हुए कहा कि उसे उन्हें यह बताने की जरूरत नहीं है कि वह मामले को समझी हैं या नहीं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘बात करने का लहजा सुधारो, मैं तुम्हारी यार नहीं हूं।’

फोन पर हुई बातचीत के दौरान अध्यक्ष ने युवक को मामले के संबंध में समझाइश दी और अगली पेशी पर उपस्थित होने के निर्देश दिए। बुजुर्ग मां को घर से निकाले जाने की शिकायत से जुड़े इस प्रकरण में अब आगे की सुनवाई में युवक का पक्ष और मामले से संबंधित तथ्य महत्वपूर्ण होंगे।

"सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई इस मैराथन जनसुनवाई का फोर्थ आई न्यूज भी साक्षी बना। दिनभर चली सुनवाई के दौरान कभी माहौल गर्म हुआ, तो कभी संवाद और समझाइश के बीच शांति नजर आई। कई मौकों पर आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू बहू को ससुर और ससुराल पक्ष के प्रति सम्मान बनाए रखने की समझाइश देती दिखीं, तो कहीं उन्होंने ससुराल पक्ष को विधवा बहू और उसके बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराया। कुल मिलाकर, ज्यादातर मामलों में उनका जोर विवाद को बढ़ाने के बजाय दोनों पक्षों को आपसी बातचीत, समझदारी और सहमति के जरिए समाधान तक पहुंचने के लिए प्रेरित करने पर रहा।"

30 प्रकरणों पर सुनवाई, 10 मामलों का निराकरण कर किया गया नस्तीबद्ध

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू की अध्यक्षता में 29 अक्टूबर 2026 को रायपुर जिले के प्रकरणों की जनसुनवाई आयोजित की गई। आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी की उपस्थिति में कुल 47 प्रकरणों में से 30 मामलों पर सुनवाई हुई। इनमें से 10 प्रकरणों का निराकरण कर उन्हें नस्तीबद्ध किया गया।

जनसुनवाई के दौरान महिलाओं से जुड़े बैंक विवाद, संपत्ति के बंटवारे, दिव्यांग महिला के रोजगार, नाबालिग बच्ची की सुरक्षा तथा घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना जैसे मामलों पर भी सुनवाई की गई। आयोग ने संबंधित पक्षों को सुनने के बाद आवश्यक कार्रवाई और दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

बैंक विवाद में महिला अधिकारी ने दर्ज कराया बयान

बैंक से संबंधित एक प्रकरण में आवेदिका के पक्ष के समर्थन में बैंक की महिला अधिकारी ने अपना बयान दर्ज कराया। आयोग ने अनावेदक पक्ष को शिकायत का जवाब और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन का समय दिया। साथ ही अगली सुनवाई में बैंक की आंतरिक शिकायत समिति से संबंधित अभिलेखों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए।

संपत्ति विवाद में दोनों पक्षों के बयान दर्ज

एक अन्य मामले में संपत्ति के बंटवारे और स्वर्गीय पति के होटल व्यवसाय में हिस्सेदारी को लेकर विवाद सामने आया। आयोग ने दोनों पक्षों की बातें सुनीं और उनके कथन दर्ज किए। इस प्रकरण को आगे की सुनवाई के लिए रखा गया।

दिव्यांग आवेदिका के रोजगार और वेतन पर निर्देश

दिव्यांग आवेदिका से जुड़े प्रकरण में आयोग ने उन्हें काम पर रखने और वेतन भुगतान के संबंध में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। इस मामले में मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पत्र भेजने के लिए भी कहा गया।

नाबालिग बच्ची की सुरक्षा और घरेलू हिंसा के मामलों में कार्रवाई के निर्देश

नाबालिग बच्ची की सुरक्षा से संबंधित शिकायत पर आयोग ने बाल संरक्षण आयोग को पत्र भेजने तथा संबंधित पुलिसकर्मी के विरुद्ध उचित कार्रवाई के लिए पुलिस विभाग को निर्देशित करने का निर्णय लिया।

वहीं, घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना से जुड़े एक अन्य प्रकरण में संबंधित थाने को उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

जनसुनवाई में ये अधिकारी रहे उपस्थित

जनसुनवाई के दौरान रायपुर संभाग प्रभारी मंजू थदानी, महिला थाना प्रभारी मौर्य, डीएसपी स्नेहा आकाश राव, वन स्टॉप सेंटर की काउंसलर नीति सिंह, प्रोटेक्शन ऑफिसर प्रीति पाण्डेय तथा आयोग कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

महिला आयोग की इस जनसुनवाई में अलग-अलग प्रकृति के मामलों पर सुनवाई करते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। बुजुर्ग मां को घर से निकाले जाने की शिकायत से जुड़ा मामला भी अगली सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

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