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“लोकतंत्र पर ‘ब्लैक टेप’ का हमला?” बंगाल चुनाव में EVM विवाद ने मचाया राजनीतिक भूचाल

"A 'black tape' attack on democracy?" The EVM controversy in the Bengal elections has sparked a political storm.

पश्चिम बंगाल की फलता विधानसभा सीट एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। चुनाव आयोग ने 21 मई 2026 को पूरे विधानसभा क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया है। आयोग का कहना है कि जांच में “गंभीर चुनावी गड़बड़ियां” और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं। मामला तब गरमाया जब भाजपा ने आरोप लगाया कि कई बूथों पर EVM के बैलेट यूनिट पर काले टेप लगाए गए थे, जिससे मतदाता एक खास पार्टी को वोट नहीं दे पा रहे थे।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष पर्यवेक्षक की जांच में कम से कम 60 बूथों पर संदिग्ध गतिविधियां पाई गईं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई जगह वीडियो फुटेज अधूरी थी और चुनाव प्रक्रिया में जानबूझकर हस्तक्षेप की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। चुनाव आयोग ने इसी आधार पर पूरे क्षेत्र में पुनर्मतदान का आदेश दिया।

इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। भाजपा ने इसे लोकतंत्र बचाने की कार्रवाई बताया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी EVM स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरने पर बैठ चुकी थीं और चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगा चुकी थीं।

चुनाव आयोग ने कहा कि प्रभावित बूथों पर करीब 53 हजार से ज्यादा मतदाता थे और इतने बड़े स्तर पर आई शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब 21 मई को होने वाला पुनर्मतदान बंगाल की राजनीति में नई बहस और संभावित विवाद को जन्म दे सकता है।