चीन के सामने घुटने टेकती सरकार या खौफनाक आत्मसमर्पण? आईटीबीपी के खुलासे से हिल गया देश!

अरुणाचल से लद्दाख तक चीन के खूनी पंजे और भारत की कूटनीति के ढीले पड़ते तारों ने देश की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आईटीबीपी (ITBP) के डायरेक्टर जनरल शत्रुजीत कपूर के ताजा खुलासे ने केंद्र सरकार के उस दावे की हवा निकाल दी है, जिसमें सब कुछ ‘नॉर्मल’ होने का राग अलापा जा रहा था। क्या देश की सुरक्षा को दांव पर लगाकर सिर्फ अपनी कुर्सी बचाई जा रही है?
अरुणाचल और लद्दाख से लेकर दिल्ली तक मचा भूचाल
सूत्रों और आज सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, आईटीबीपी के डीजी शत्रुजीत कपूर ने सीमा पर चीन की सेना के साथ लगातार बने हुए फेसऑफ (टकराव) की पुष्टि कर दी है। महीनों से इस संवेदनशील जानकारी को दबाने की कोशिशें अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी हैं। विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सीधा सवाल पूछा है कि जब देश के जवान विपरीत परिस्थितियों में सीना तानकर खड़े हैं, तो शीर्ष नेतृत्व की तरफ से बहादुरी को शाबाशी और शहादत को सलाम क्यों नहीं दिया जाता?
“लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक अगर चीन लगातार दुस्साहस दिखा रहा है, तो इसके पीछे उस तथाकथित क्लीन चिट का हाथ है जो पहले दी गई थी।”
इन तीखे सवालों के घेरे में सरकार
- पेट्रोलिंग पॉइंट्स का सच: क्या अरुणाचल प्रदेश के शेरा पांच, असाफिला, माझा और तक्षशि जैसे इलाकों में हमारे जवान आज भी बेरोक-टोक गश्त कर पा रहे हैं या वहां चीन ने अपने टेंट गाड़ लिए हैं?
- नया ‘स्टेटस को’ (Status Quo): क्या सरकार ने पुरानी यथास्थिति (Status Quo Ante) की मांग छोड़ दी है और 26 पेट्रोलिंग पॉइंट्स के नुकसान को चुपचाप स्वीकार कर लिया है?
- आर्थिक निर्भरता क्यों?: एक तरफ सीमा पर आंखें दिखाई जा रही हैं, तो दूसरी ओर टनल बोरिंग मशीन (TBM), रेयर अर्थ मिनरल्स, फर्टिलाइजर और दवाइयों के एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) के लिए चीन पर निर्भरता लगातार क्यों बढ़ाई जा रही है?
- ट्रेड डेफिसिट का विस्फोट: भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 112 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाने के बाद भी ठोस रणनीतिक कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे?
विपक्ष की खुली चुनौती: “चलो, सीमा पर सैर कराओ!”
विपक्ष ने सरकार को खुली चुनौती दी है कि अगर सब कुछ ‘नॉर्मल’ है, तो गृह मंत्री, विपक्ष के नेता और इंडिया गठबंधन के तमाम प्रतिनिधियों को लेकर अरुणाचल और लद्दाख के उन तमाम संवेदनशील पॉइंट्स की जमीनी यात्रा कराई जाए, ताकि देश की जनता को सच का आईना दिखाया जा सके।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस तीखे सियासी हमले और सुरक्षा से जुड़े इन गंभीर खुलासों पर क्या आधिकारिक जवाब देती है। देश की नजरें इस वक्त दिल्ली के गलियारों और बर्फीली सरहदों पर टिकी हैं।
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