1 नवंबर 2026 को आंध्र प्रदेश के एक सरकारी स्कूल की चहारदीवारी के भीतर घटी एक जघन्य वारदात ने पूरे देश को सन्न कर दिया है। स्कूल के भीतर एक नाबालिग बच्ची पर एक आरोपी ने जानलेवा हमला कर उसे खून से लथपथ कर दिया। हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गंभीर रूप से घायल बच्ची की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत विशेष विमान/एंबुलेंस के जरिए बंगलूरू के बेहद महंगे और एडवांस अस्पताल में रेफर करना पड़ा। इस खूनी वारदात के बाद आंध्र प्रदेश की राजनीति और कानून-व्यवस्था के दावों में आग लग गई है।
घटना तब घटी जब स्कूल में कक्षाएं चल रही थीं। आरोपी ने अचानक परिसर में घुसकर हमला बोला, जिसमें बीच-बचाव करने आई एक अन्य सहपाठी बच्ची भी गंभीर रूप से जख्मी हो गई। स्कूल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर दिनदहाड़े हुए इस खूनी खेल ने अभिभावकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोगों ने स्कूल का घेराव कर डाला और राज्य की कानून-व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त करार दिया। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने तुरंत बयान जारी कर सरकार की ओर से इलाज का पूरा खर्च उठाने और आरोपी को सख्त सजा दिलाने का आदेश दिया, लेकिन इससे जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ है।
विपक्षी पार्टियों ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि जब प्रदेश के अंदर स्कूल में बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं, तो आम सड़कों की सुरक्षा का क्या कहना? सुरक्षा व्यवस्था में इस कदर घोर लापरवाही का जिम्मेदार कौन है? क्या स्कूलों में कोई सुरक्षा जांच या गार्ड तैनात नहीं थे? अभिभावकों का कहना है कि सरकारें सिर्फ घोषणाओं में मस्त हैं, जबकि धरातल पर अपराधियों के दिल से कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है।
बंगलूरू के अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही बच्ची की हालत अभी भी बेहद गंभीर बनी हुई है। इस घटना ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर हमारी शिक्षा व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियां कब जागेंगी? क्या हर बार एक मासूम के खून से नहाने के बाद ही प्रशासन अपनी नींद से जागेगा?















Leave a Reply