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छत्तीसगढ़: सत्ता खोने के बाद विपक्ष में भी बीजेपी ‘फेल’

  • विपक्ष से यह उम्मीद होती है कि वह सड़क से लेकर सदन तक आम आदमी की आवाज बनकर उभरेगा. एक तरफ बीजेपी के लोग कांग्रेस सरकार पर वादा खिलाफी के आरोप तो लगा रही है वहीं दो महीने से अधिक हो जाने के बाद भी जनहित को लेकर कोई बड़ा आंदोलन नहीं कर पाई है.
  • पहली बार जब बीजेपी 6 फरवरी को धरने पर बैठी तब भी एसआईटी गठन के विरोध में. यह किसी से छिपा नहीं है कि जितने मामलों में एसआईटी गठित हो रही है. उसमे बीजेपी के ही दिग्गज फंसे हुए है. हालांकि यह भी माना जा रहा है कि हार के बाद पड़ी फूट के चलते पार्टी को संगठित करना एक बड़ी चुनौती हो गई है.
  • वहीं इस मसले पर बीजेपी के अपने ही दावें है. बीजेपी प्रवक्ता सुभाष राव का कहना है कि कांग्रेस को सत्ता में आए केवल दो महीने हुए है. उनकों काम करने का अवसर तो देना ही पड़ेगा.
  •  वो काम करेंगे तो जनता को उनकी गलती का ऐहसास होगा. जनता के सारे मुद्दों को लेकर अंदोलन करेगी. वहीं कांग्रेस प्रवक्ता किरणमयी नायक का कहना है कि बीजेपी अब जनता के बीच जाने लायक नहीं. जिस तरह से पुरानी सरकार के घोटालों से रोज खुलासे हो रहे है, वो अपनी गर्दन बचाएं या आंदोलन करें. आंदोलन भी करेंगे तो जनता तो सबसे पहले सवाल उनसे हीं करेंगी.
  • हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञ रविकांत कौशिक का कहना है कि संगठन के तौर पर बीजेपी पूरी तरह से बिखर चुकी है. कार्यकर्ताओं की नाराजगी अब तक दूर नहीं हुई है. ऐसे में जनहित के लिए आंदोलन तब हों जब संगठित हों. प्रदेश में पार्टी जो एक-दो प्रदर्शन कर रही हैं उसमें गिनती के कार्यकर्ता दिखाई देते है.
  • जाहिर तौर पर बीजेपी को सोचने की जरूरत है 11 सीटों के तमाम दावों के बीच धरातल पर जो नजारा दिखाई दे रहा है वह कुछ और है. सदन के साथ सड़क पर जब तक विपक्ष की आवाज नहीं सुनाई देगी तब तक रास्ता आसान नहीं है. वहीं इसके लिए सबसे ज्यादा संगठन के तौर पर मजबूत होना ही होगा.

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