छत्तीसगढ़ में होती है वंशवाद की राजनीति !

रायपुर: भाजपा भले ही वंशवाद के मुद्दे पर कांग्रेस को कितना भी घेरे, लेकिन हकीकत ये है कि भाजपा खुद भी वंशवाद से अछूती नहीं है, आज हम छत्तीसगढ़ के ऐसे ही कुछ परिवारों के बारे में बात करेंगे, जो पीढ़ी दर-पीढ़ी, राजनीति में सक्रिय हैं और आने वाले चुनावों में भी, इन परिवारों के सदस्य चुनाव मैदान में जोर आजमाइश करते दिखाई देंगे.

प्रदेश के मुखिया से करते हैं शुरूआत

सबसे पहले बात मुख्यमंत्री, डॉ रमनसिंह से ही शुरू करते हैं, रमनसिंह के बेटे अभिषेक सिंह, जो फिलहाल सांसद हैं और हो सकता है कि आने वाले वक्त में वे विधायक का चुनाव भी लड़ें, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पत्नी डॉक्टर रेणु जोगी लगातार विधायक बनती आ रही हैं, उनके बेटे अमित जोगी भी मरवाही से विधायक हैं, तो महेन्द्र कर्मा की पत्नी देवती कर्मा,  नंदकुमार पटेल के बेटे उमेश पटेल विधायक हैं.

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शुक्ल परिवार का राजनीति में रहा है दबदबा

अब अगर बात दूसरे नेताओं की करें तो पंडित रविशंकर शुक्ल, श्यामाचरण शुक्ल, विद्याचरण शुक्ल,  भगवतीचरण शुक्ल,  अमितेष शुक्ल, राजनीतिक वंशवाद के उदाहरण हैं, राघवेन्द्र राव, अशोक राव, परिवार की वाणीराव. खैरागढ़ के राजा वीरेन्द्र बहादूर सिंह की पत्नी, पदमावती देवी, शिवेन्द्र बहादूर सिंह, गीतादेवी, रश्मि देवी, देवव्रत सिंह.  पूर्व मुख्यमंत्री नरेश चंद सिंह की बेटी कमला देवी सिंह,  पुष्पादेवी सिंह. सरायपाली के कुमार वीरेन्द्र बहादूर सिंह, भाई महेन्द्र बहादूर सिंह, पुखराज सिंह, देवेन्द्र बहादुर सिंह.

नाम भी खत्म नहीं हुए हैं

विसाहुदास महंत, चरणदास महंत, दिलीप सिंह जूदेव, युद्धवीर सिंह,  कुमारी देवी चौबे, प्रदीप चौबे. रविन्द्र चौबे, बलीराम कश्यप के बेटे दिनेश कश्यप, केदार कश्यप,  लखीराम अग्रवाल के बेटे अमर अग्रवाल,  मोतीलाल वोरा के बेटे अरूण वोरा, झुमुकलाल भेड़िया के भतीजा डोमेन्द्र भेड़िया, पुन्नुलाल मोहले के विक्रम मोहिले, मिनीमाता के दत्तक पुत्र विजय गुरू पोता रूद्र गुरू, अरविंद नेताम, पत्नी छबीला नेताम, भाई शिव नेताम, रमेश बैस, उनके भाई श्याम बैस जैसे कई नाम हैं जो छत्तीसगढ़ की राजनीति में वंशवाद का उदाहरण पेश करते हैं.

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जो रहे वो आप बता सकते हैं.

हालांकि इन नामों में कई और ऐसे नाम है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी राजनीति करते आ रहे हैं, फिर वो चाहे भाजपा के हों या कांग्रेस के, हर पार्टी वरिष्ठ नेता या उनके परिवार वालों को टिकट देती आई है और साल 2018 के चुनावों में भी देगी, लिहाजा अगर कुछ नाम छूट गए हैं, तो आप हमें उनके नाम कमेंट कर बता सकते हैं ।

-एक वरिष्ठ पत्रकार से बातचीत के आधार पर, फोर्थ आई न्यूज की रिपोर्ट

 

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