वाशिंगटन में भारतीय विदेश सचिव का करारा प्रहार! अमरीकी प्रतिबंधों और दबाव नीति के आगे झुके बिना भारत ने फिर गाड़ा अपनी संप्रभुता का झंडा!

अमेरिका के नए कड़े कानूनों और वैश्विक प्रतिबंधों की गीदड़भभकी के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी विदेश नीति किसी महाशक्ति के इशारे पर नहीं चलेगी। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने वाशिंगटन में अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक में भारत के रुख को चट्टान की तरह मजबूत रखा है।
हाल ही में अमेरिकी संसद में पारित हुए ‘सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारत ने साफ कर दिया कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोच्च हैं। विक्रम मिस्री ने अमेरिकी प्रतिनिधि ब्रायन मास्ट के नेतृत्व वाले द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ आतंकवाद विरोध, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता और ऊर्जा सुरक्षा पर कड़ा भारत-केंद्रित पक्ष रखा। भारत ने दिखा दिया कि उसे न तो किसी पश्चिमी दबाव में मोड़ा जा सकता है और न ही उसकी संप्रभु विदेश नीति पर कोई उंगली उठा सकता है।
भारत आज दुनिया का वो आर्थिक और सैन्य केंद्र है जिसके बिना अमेरिका भी वैश्विक व्यवस्था चलाने की कल्पना नहीं कर सकता। इस बैठक से स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका चाहे जितने कड़े कानून बना ले, भारत अपने राष्ट्रीय हितों से 1 इंच भी समझौता नहीं करेगा।
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