मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा झटका: अमेरिका पर भरोसा टूटा, तो ट्रंप को ठेंगा दिखा एकजुट होने लगे खाड़ी देश!
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अमेरिका की अप्रत्याशित और आक्रामक विदेश नीतियों के चलते मध्य पूर्व (Middle East) में दशकों पुराना सुरक्षा समीकरण ताश के पत्तों की तरह ढह गया है। न्यू यॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक से ठीक पहले खाड़ी देशों ने अमेरिका की मध्य-पूर्व नीति के खिलाफ बगावती तेवर अपना लिए हैं।
अमेरिकी रक्षा छत्रछाया पर आंख बंदकर भरोसा करने वाले गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के देश अब खुद को पूरी तरह ठगा और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। दोहा (कतर) पर हाल में हुए इजराइली हमलों और ईरान के साथ भड़की सीधी जंग के बाद अमेरिका के रवैये ने खाड़ी देशों की आंखें खोल दी हैं। कतर के प्रधानमंत्री ने अमेरिका पर निर्भरता खत्म करने का खुला ऐलान करते हुए ईरान सहित पूरे क्षेत्र को मिलाकर एक नया ‘क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा’ बनाने का दांव चल दिया है। इतना ही नहीं, ट्रंप के दबाव को नकारते हुए ये देश अब चीन के साथ मिलकर एक गैर-डॉलर समानांतर ट्रेड पाइपलाइन विकसित कर रहे हैं।
मध्य पूर्व से अमेरिका का वर्चस्व खत्म होना वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में एक करारा तमाचा माना जा रहा है, और ट्रंप की नीतियों ने अपने ही सबसे भरोसेमंद सहयोगियों को दुश्मन के पाले में धकेल दिया है।




