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भारत ने पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका! सिंधु जल संधि पर कड़ा रुख, अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ा तनाव

भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर की जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान की आपत्तियों पर बड़ा रुख अपनाते हुए स्थायी मध्यस्थता न्यायालय के फैसले को खारिज कर दिया है। 22 मई 2026 को यह मुद्दा फिर चर्चा में आया जब विदेश मंत्रालय के बयान को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई। Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने साफ कहा कि जिस कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने फैसला सुनाया, उसे भारत वैध नहीं मानता। सरकार ने दोहराया कि सिंधु जल संधि को “abeyance” यानी स्थगित रखने का फैसला जारी रहेगा।

रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान ने किशनगंगा और रतले हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। लेकिन भारत का कहना है कि यह प्रक्रिया अवैध तरीके से बनाई गई थी और उसका कोई निर्णय भारत पर लागू नहीं होता। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे, जिनमें सिंधु जल संधि को स्थगित करना भी शामिल था।

इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर राष्ट्रवाद और कूटनीतिक रणनीति को लेकर बहस तेज हो गई। विपक्ष सरकार से पूछ रहा है कि क्या इससे अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है, जबकि सरकार समर्थक इसे पाकिस्तान के खिलाफ मजबूत संदेश बता रहे हैं। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह विवाद दक्षिण एशिया की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।

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