इराक के प्रधानमंत्री ट्रंप की चौखट पर, लेकिन रिमोट कंट्रोल भारत के हाथ में! कच्चे तेल की वैश्विक किल्लत के बीच भारत की चांदी
भारत-अमेरिका-इराक त्रिकोण और तेल आपूर्ति (भारत का फेवर)

कच्चे तेल के सबसे बड़े गढ़ मध्य पूर्व में मचे हाहाकार के बीच इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी आज वॉशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने पहुंचे हैं। पिछले 24 घंटों में अमेरिका ने बगदाद पर ईरान समर्थित मिलिशिया और ईरानी प्रभाव को पूरी तरह कुचलने का भारी दबाव बनाया है। लेकिन इस पूरी क्रूड-पॉलिटिक्स का जो सबसे दिलचस्प और भारत के पक्ष का पहलू है, वह यह है कि इराक ने अमेरिका के प्रतिबंधों की परवाह किए बिना भारत को तेल की निर्बाध आपूर्ति जारी रखने का गुप्त भरोसा दिया है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले 24 घंटे में 9% से अधिक उछल चुकी हैं, जिससे पश्चिमी देश मंदी के खौफ से कांप रहे हैं।
यह स्थिति भारत के लिए कूटनीतिक जैकपॉट साबित हो रही है। जहां एक तरफ ईरान ने होर्मुज में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों (मोम्बासा और अल बहिया) पर क्रूज मिसाइलें दागकर उन्हें आग के हवाले कर दिया, वहीं भारतीय रणनीतिक दूरदर्शिता के कारण भारत को होने वाली तेल आपूर्ति सुरक्षित है। संभावनाएं बताती हैं कि इराक और खाड़ी देश अपने आर्थिक अस्तित्व को बचाने के लिए अमेरिका के बजाय भारत को अपना सबसे भरोसेमंद खरीदार बनाए रखेंगे।
भारतीय तेल रिफाइनरियों ने पहले ही वैकल्पिक मार्गों और रूस से लॉन्ग-टर्म समझौतों के जरिए अपने भंडार भर लिए हैं। इस युद्ध के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत को एक बड़े रिफाइंड तेल निर्यातक के रूप में स्थापित कर रही हैं, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की संभावना है।




