UNGA में भारत का करारा प्रहार! जयशंकर ने पश्चिमी देशों को आइना दिखाया

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक मंचों पर पश्चिमी ताकतों के दोहरे रवैये और विफलता की धज्जियां उड़ा कर रख दीं। जयशंकर ने ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) की आवाज बनते हुए दुनिया के सामने साफ कर दिया कि दशकों पुरानी पुरानी व्यवस्था अब काम नहीं करेगी, बहुपक्षवाद को बचाना है तो भारत जैसे मजबूत देश को बराबरी का अधिकार देना ही होगा।
दुनिया में जारी भीषण संघर्षों, खाद्य-ईंधन संकट (4F Crisis) और आर्थिक मंदी के बीच जब संयुक्त राष्ट्र लाचार दिखाई दे रहा है, तब भारत ने फ्रंटफुट पर आकर कमान संभाल ली है। जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक UN सुरक्षा परिषद में बदलाव नहीं होते और वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों की भागीदारी तय नहीं होती, तब तक शांति की बातें महज ढोंग हैं। यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया के तनाव तक, भारत ने लगातार संवाद और कूटनीति का रास्ता दिखाया है, जबकि बड़ी पश्चिमी शक्तियां केवल अपनी रोटियां सेकने में लगी हैं।
भारत अब किसी भी महाशक्ति के दबाव में झुकने वाला देश नहीं है। चाहे रूसी तेल खरीदने की बात हो या वैश्विक मंचों पर स्वतंत्र स्टैंड लेने की, नई दिल्ली ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखकर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई है। भारत की इस दहाड़ ने संयुक्त राष्ट्र के बंद कमरों में बैठे आकाओं की नींद उड़ा दी है।
ये खबर भी पढ़ें—:




