क्रेमलिन का खौफनाक पलटवार और खाद्य बाजार में हाहाकार

यूक्रेन ने पुतिन के साम्राज्य की आर्थिक रीढ़ पर ऐसा खूनी प्रहार किया है कि पूरी दुनिया के कमोडिटी बाजारों में कोहराम मच गया है। रूस के सबसे महत्वपूर्ण काला सागर बंदरगाह नोवोरोस्सियस्क पर हुए अंधाधुंध यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने इस भीषण युद्ध को एक नए और बर्बर मुकाम पर पहुंचा दिया है। इस प्रलयकारी हमले में मासूम नागरिकों की मौत ने कीव की सेना के अमानवीय और क्रूर चेहरे को बेनकाब कर दिया है।
बौखलाए क्रेमलिन ने इन हमलों को ‘कीव का घिनौना और पाखंडी सैन्य आतंकवाद’ करार दिया है। रूसी विदेश मंत्रालय ने दहाड़ते हुए कहा है कि यह पश्चिमी देशों के इशारों पर दुनिया को भुखमरी के रास्ते पर धकेलने की सोची-समझी साजिश है। इसके जवाब में रूसी मिसाइलों ने यूक्रेनी कृषि शिपमेंट पर ऐसा कहर बरपाया है कि यूक्रेनी अनाज निर्यात सीधे 76 प्रतिशत तक धड़ाम हो गया है।
रणक्षेत्र का खूनी सच और बाजार में लूट
रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं का सौदागर है और नोवोरोस्सियस्क उसका सबसे मजबूत आर्थिक किला है।
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के आक्रामक मोर्चों और ओलेक्सांद्रिव्स्की सेक्टर में जबरन जमीन कब्जाने के दावों ने रूस को गुस्से से पागल कर दिया है।
वैश्विक कमोडिटी बाजारों में गेहूं और खाद्य तेलों के फ्यूचर्स आसमान फाड़कर ऊपर भाग रहे हैं, जिससे विकासशील देशों की थाली से निवाला छिनने का खतरा पैदा हो गया है।
यदि वैश्विक बाजार में अन्न के ये दाम इसी तरह आग उगलते रहे, तो अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन का तहस-नहस होना तय है।
क्या युद्ध के मैदान में अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए इंसानी पेट और भोजन को हथियार बनाना मानवता के खिलाफ सबसे बड़ा और घिनौना पाप नहीं है?



