लद्दाख हिंसा के पीड़ितों को 15 लाख का मुआवजा, क्या गोलीबारी के घाव भर पाएगी ये ‘कीमत’?

लेह में हुई भीषण हिंसा और पुलिस फायरिंग में मारे गए 4 प्रदर्शनकारियों के परिजनों के लिए उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा 15 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान होते ही राजनीति फिर गरमा गई है। संवैधानिक सुरक्षा और पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग कर रहे निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर चलाई गई गोलियों के जख्म आज भी ताजा हैं। सरकार इसे ‘संवेदनशील कदम’ बताकर अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि स्थानीय जनता और अधिकार कार्यकर्ता इसे सिर्फ एक राजनीतिक लीपापोती मान रहे हैं। एक साल बीत जाने के बाद भी गोली चलाने के दोषियों पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। सोनम वांगचुक समेत कई कार्यकर्ताओं पर दर्ज मुकदमों और एनएसए (NSA) के इस्तेमाल ने पहले ही केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा कर रखा है। पैसों का लालच देकर इंसानी जानों की कीमत लगाना और अधिकारों की आवाज दबाना लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा है।



