समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बनी किसानों का संबल, आमदी की बिटावन बाई की मुस्कान में झलकी सफलता

रायपुर। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था अब किसानों के लिए भरोसे और पारदर्शिता का मजबूत आधार बन चुकी है। धमतरी जिले के आमदी गांव की किसान बिटावन बाई ध्रुव इसकी जीवंत मिसाल हैं। उनके चेहरे पर दिखती संतुष्टि इस बात का प्रमाण है कि जब व्यवस्थाएं सही ढंग से ज़मीन पर उतरती हैं, तो मेहनत का पूरा फल मिलता है।
बिटावन बाई ने अपने साढ़े चार एकड़ खेत में मेहनत से धान की फसल उगाई और इस साल 92 क्विंटल उत्पादन किया। धान लेकर जब वे आमदी सहकारी समिति पहुंचीं, तो ऑफलाइन टोकन से लेकर तौल, बारदाना, छाया और पेयजल तक सभी सुविधाएं समय पर और व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रहीं। पूरी प्रक्रिया सरल और सहज रही, जिससे उन्हें किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
धान बिक्री से मिली आय का एक हिस्सा वे पुराने कर्ज चुकाने में लगाएंगी, जिससे आर्थिक बोझ कम होगा। वहीं बड़ी राशि दलहन उत्पादन में निवेश करने की योजना है, ताकि आय के नए स्रोत बनें और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहे। रबी मौसम में वे विशेष रूप से चने की खेती कर रही हैं।
बिटावन बाई बताती हैं कि पहले धान बेचने को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी, लेकिन अब समय पर खरीदी और भुगतान की व्यवस्था ने शासन-प्रशासन पर उनका भरोसा और मजबूत किया है। खेती ही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन है। उनके दो बेटे, बहू और नाती-पोते हैं। धान से मिली आमदनी का उपयोग वे बच्चों की पढ़ाई में भी करेंगी, ताकि आने वाली पीढ़ी शिक्षित और आत्मनिर्भर बन सके।
उनकी कहानी यह संदेश देती है कि किसान हितैषी नीतियां जब प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होती है और किसान आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ते हैं।




