छत्तीसगढ़

घट स्थापना के साथ विराजित हुईं शक्ति स्वरूपा

अश्विन नवरात्र प्रारंभ के साथ वातावरण भक्ति और आस्था से सराबोर हो गया है। शक्ति स्वरूपा देवी दुर्गा की प्रतिमाओं की स्थापना शहर और अंचल में की गई है। यह सिलसिला रात्रि तक चलेगा। मंदिरों और आयोजन स्थलों पर घट स्थापना व ज्वारा बोए गए हैं। पूरे नौ दिन तक मनाए जाने वाले नवरात्र पर्व को लेकर सभी आवश्यक तैयारी की गई है। सुरक्षा के प्रबंधों की समीक्षा के साथ इस दिशा में जोर दिया गया है। शक्ति की उपासना के लिए क्वांर नवरात्र को जाना जाता है। शुम्भ अशुम्भए महिषासुर और रक्तबीज जैसे राक्षसों का अंत करने के लिए देवी ने शक्ति की आराधना अतीत में की थी और इनके समन्वित प्रयासों से विजय का वरण किया था। तब से नवरात्र पर्व को इसी रूप में मनाने की परंपरा है।
कोरबा के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्र में शक्ति की उपासना का यह पर्व आज से प्रारंभ हो गया। मिली.जुली संस्कृति की तस्वीर इसमें नजर आ रही है। अनेक स्थानों पर आज विशेष मुहूर्त में घट स्थापना के साथ ज्वारे बोए गए और शक्ति स्वरूपा की जागृत प्रतिमाओं की स्थापना की गई। बीज मंत्र और शास्त्रोक्त विधि के साथ इसे पूर्ण किया गया। पुरोहितों और उनके ऋत्विक इस कार्य को संपादित करा रहे हैं। रात्रि तक विभिन्न क्षेत्रों में यह परंपरा चलेगी और इसके जरिए देवी प्रतिमा अपने गृह में विराजित होंगीं। आज से अगले नौ दिन तक शक्ति के नौ अलग-अलग स्वरूप की पूजा अर्चना मंदिरों के साथ-साथ पूजा मंडपों में की जाएगी और कुल मिलाकर इस दौरान निर्दिष्ट लक्ष्य व उद्देश्य के लिए देवी का स्मरण किया जाएगा। सभी स्थानों पर बड़ी संख्या में भक्तों की उपस्थिति आरती व अन्य कार्यों के लिए दर्ज होगी। समितियों ने इन कार्यों को संपन्न करने के लिए उप स्तर पर समितियां बनाई है। प्रतिदिन प्रसाद व अन्य कार्य यहां पर संपन्न होंगे। जस व देवी गीतों के कार्यक्रम भी नवरात्र के दौरान दुर्गा पूजा स्थलों पर जसगीतों की प्रस्तुति होगी और देवी के भजनों के कार्यक्रम भी किये जाएंगे। स्थानीय बोली के साथ-साथ अन्य भाषा में रचे.बसे ऐसे गीत देवी की महिमा को रेखांकित करेंगे और लोगों को आनंदित। नवरात्र के आयोजन में ग्रामीण क्षेत्र के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का भरपूर मौका नौ दिन तक मिलेगा। आज से ही इसकी शुरुआत हो रही है।

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