रायपुर में गूंजा अध्यात्म का महाकुंभ: विनयकुशल मुनि बने आचार्य, ओम बिरला और विष्णुदेव साय ने लिया आशीर्वाद

राजधानी रायपुर का सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम उस समय भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया, जब आचार्य पदारोहण एवं सहस्त्रावधान तपस्या महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शामिल होकर जैन संतों का आशीर्वाद लिया और आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हुए पूज्य विनयकुशल मुनि जी महाराज को नमन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओम बिरला ने कहा कि आचार्य पद केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि तप, त्याग, ज्ञान और समाज को मार्गदर्शन देने वाली सर्वोच्च साधना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर की अहिंसा, करुणा और आत्मसंयम की शिक्षाएं आज के तनावपूर्ण विश्व में मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
उन्होंने विनयकुशल मुनि के आचार्य पदारोहण को पूरे जैन समाज के लिए गौरव का क्षण बताया। साथ ही बाल शतावधानी हंसभद्र मुनि की अद्भुत स्मरण शक्ति और ज्ञान साधना की सराहना करते हुए कहा कि उनका तप और अनुशासन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर पहली बार आयोजित यह भव्य आचार्य पदारोहण महोत्सव प्रदेश के लिए ऐतिहासिक और सौभाग्य का अवसर है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन श्रद्धा, संस्कृति और साधना का ऐसा संगम है, जिसने पूरे प्रदेश में आध्यात्मिक चेतना का संचार किया है।
मुख्यमंत्री ने 14 वर्षीय शतावधानी हंसभद्र मुनि की विलक्षण प्रतिभा को नमन करते हुए कहा कि हजारों प्रश्नों को स्मरण रखकर क्रमवार उत्तर देना असाधारण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि जैन संतों के अहिंसा, सत्य, करुणा और संयम के संदेश की आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने भी इस आयोजन को छत्तीसगढ़ के लिए गौरवशाली क्षण बताया। उन्होंने कहा कि जैन संतों का तपस्वी और अनुशासित जीवन समाज को नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करता है।
महोत्सव में देशभर से आए संत-साध्वी, सकल जैन श्रीसंघ के पदाधिकारी, बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।



