सुप्रीम कोर्ट का वो एक फैसला जिसने विपक्ष की नींद उड़ाई, चुनाव आयोग के ‘फॉर्म 6’ विवाद पर आया सबसे बड़ा मोड़!

भारत के लोकतंत्र को कमजोर बताने की साजिश रचने वाली ताकतों और बिना किसी सबूत के हल्ला मचाने वाले विपक्षी गठबंधनों को देश की सर्वोच्च अदालत से कड़ा संदेश मिला है। सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और वोटर लिस्ट के ‘फॉर्म 6’ बदलाव को लेकर दाखिल की गई याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोटूक स्पष्टीकरण जारी किया है। जहां एक तरफ विपक्ष सड़कों पर उतरकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ भ्रामक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा था, वहीं देश की न्यायपालिका ने संवैधानिक प्रक्रियाओं की गरिमा को सर्वोच्च रखते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी संस्थागत सुधार की प्रक्रिया कानून और तथ्यों के आधार पर ही तय होगी।
दिल्ली के मध्य क्षेत्र में विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन और घेराबंदी के बीच, सुप्रीम कोर्ट का यह रुख साफ करता है कि देश की प्रशासनिक और लोकतांत्रिक नींव को राजनैतिक स्टंटबाजी से नहीं हिलाया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया में अगर कोई प्रशासनिक बदलाव हुए हैं, तो उसकी पूरी जांच रिकॉर्ड के आधार पर होगी, न कि सड़क पर मचे हो-हल्ले से। भारत का निर्वाचन आयोग दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को पूरी पारदर्शिता से संचालित करने के लिए सक्षम है और सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी यह सिद्ध करती है कि देश में कानून का राज ही सर्वोपरि है।
सर्वोच्च अदालत के इस संवैधानिक रुख ने साफ कर दिया है कि बिना ठोस सबूतों के लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला करने की राजनीति अब चलने वाली नहीं है। भारत की न्यायपालिका और संस्थाएं मजबूत हैं और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था किसी भी राजनैतिक दबाव के आगे नहीं झुकेगी।
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