रायपुर में किसानों को मिली धान की 6 नई उन्नत किस्में, ज्यादा उपज और कम समय में पकने की खासियत

रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में किसानों को धान की छह नई उन्नत म्यूटेंट किस्मों के मिनी किट वितरित किए गए। ये किस्में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर, ट्रॉम्बे (मुंबई) के सहयोग से विकसित की गई हैं। नई किस्में पारंपरिक धान की तुलना में जल्दी तैयार होती हैं, अधिक उत्पादन देती हैं, कम ऊंचाई की होती हैं और कीट व रोगों के प्रति ज्यादा सहनशील मानी जा रही हैं।
कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए प्रगतिशील किसानों को विक्रम ट्रॉम्बे छत्तीसगढ़ राइस (विक्रम टीसीआर), ट्रॉम्बे छत्तीसगढ़ विष्णुभोग म्यूटेंट, सोनागाथी म्यूटेंट, दुबराज म्यूटेंट-1, बौना लुचाई और जवाफूल म्यूटेंट के बीज दिए गए।
कृषि उत्पादन आयुक्त शहला निगार ने कहा कि छत्तीसगढ़ का असली धन यहां का धान है, जिसकी गुणवत्ता देशभर में अलग पहचान रखती है। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्नत किस्मों को अपनाने पर जोर दिया। साथ ही बताया कि सरकार खरीफ सीजन में 40% पारंपरिक किस्मों को नई उन्नत किस्मों से बदलने की योजना पर काम कर रही है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने बताया कि पिछले एक दशक से म्यूटेशन ब्रीडिंग तकनीक के जरिए फसलों में सुधार का काम किया जा रहा है। इस प्रक्रिया से ऐसी किस्में तैयार की जा रही हैं, जिनमें अधिक उत्पादन, कम समय में पकने, सूखा सहनशीलता और बेहतर पोषण जैसे गुण शामिल हैं।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने रेडिएशन तकनीक और नाभिकीय कृषि के उपयोग पर भी जानकारी दी, जिससे भविष्य में कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव की संभावनाएं जताई गईं।




