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हॉर्मुज़ का गला दबा तो दुनिया हिल गई: तेल 100 डॉलर पार, बाजारों में दहशत

24 मार्च 2026 को वैश्विक बाजारों ने फिर साबित कर दिया कि दुनिया की असली नसें अब भी तेल से चलती हैं। Reuters के मुताबिक ईरान द्वारा अमेरिका से बातचीत से इनकार और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर जारी तनाव के बाद Brent crude करीब 4% चढ़कर 103.94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि WTI भी तेज उछला। इससे पहले सिर्फ एक दिन में तेल 10% से ज्यादा गिरा था, जब ट्रंप ने हमले टालने और बातचीत की उम्मीद जताई थी। यानी दुनिया का ऊर्जा बाजार अब तथ्यों से ज्यादा संकेतों और बयानों पर चल रहा है।

मामला इसलिए खतरनाक है क्योंकि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस शिपमेंट गुजरते रहे हैं। Reuters और AP दोनों के अनुसार इस मार्ग पर संकट ने एशिया, यूरोप और उभरते बाजारों को ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर असहज कर दिया है। जापान तेल भंडार खोलने की तैयारी में है, दक्षिण कोरिया ऊर्जा बचत मोड में जा रहा है, और भारत जैसे आयातक देशों पर अतिरिक्त दबाव साफ दिख रहा है। वैश्विक शेयर बाजारों में भी यह डर दिखा—डॉलर मजबूत हुआ, बॉन्ड यील्ड चढ़ीं और निवेशकों ने जोखिम कम करना शुरू किया।

यही वह खबर है जो आम लोगों की जिंदगी में सबसे तेजी से घुसती है। तेल महंगा होता है तो सिर्फ पेट्रोल नहीं, ट्रांसपोर्ट, सब्जी, गैस सिलेंडर, फ्लाइट, फैक्ट्री लागत—सब महंगे होते हैं। इसलिए 24 मार्च की यह खबर केवल कमोडिटी मार्केट अपडेट नहीं, बल्कि वैश्विक महंगाई के अगले दौर की चेतावनी भी है। असली विवाद यह है कि क्या कुछ नेताओं की बयानबाजी और युद्ध रणनीति ने पूरी दुनिया को ऊर्जा बंधक बना दिया है? फिलहाल बाजार का जवाब है—हाँ, और कीमत अब हर देश को चुकानी पड़ रही है।

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