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अमेरिका-ईरान तनाव के बीच तालिबान का बड़ा ऐलान, हमले की स्थिति में तेहरान के साथ खड़ा रहेगा काबुल

Amid US-Iran tensions, the Taliban made a major announcement, vowing to stand with Tehran in case of an attack.

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब क्षेत्रीय समीकरणों को भी गर्मा दिया है। संभावित अमेरिकी हमले की आशंका के बीच अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने खुलकर ईरान के समर्थन का संकेत दिया है।

तालिबान के प्रवक्ता Zabihullah Mujahid ने एक इंटरव्यू में कहा कि यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है और तेहरान काबुल से मदद मांगता है, तो अफगानिस्तान उसका साथ देगा। उन्होंने साफ किया कि काबुल ईरान के साथ सहयोग करने को तैयार है।

मुजाहिद ने यह भी कहा कि तालिबान अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध नहीं चाहता और परमाणु मुद्दे का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी देश को बाहरी हमले के खिलाफ अपनी रक्षा का अधिकार है।

दिलचस्प बात यह है कि ईरान (शिया बहुल देश) और सुन्नी विचारधारा वाले तालिबान के रिश्ते अतीत में तनावपूर्ण रहे हैं, खासकर अफगान शरणार्थियों के मुद्दे पर। इसके बावजूद मौजूदा हालात में तालिबान का यह रुख क्षेत्रीय राजनीति में अहम संकेत माना जा रहा है।

तनाव की पृष्ठभूमि में Donald Trump द्वारा तेहरान को दी गई चेतावनियां और अमेरिकी सैन्य गतिविधियां चर्चा में हैं। अमेरिका ने एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln को क्षेत्र में तैनात कर अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत की है।

इस बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने भी ईरान के समर्थन में बयान देते हुए लाल सागर मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर फिर से हमले शुरू करने की धमकी दी है।

हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता दोबारा शुरू हो चुकी है, लेकिन आक्रामक बयानबाजी और सैन्य तैयारियों ने क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में कूटनीति और शक्ति प्रदर्शन के बीच संतुलन किस ओर झुकेगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।