देश के लाखों मेधावी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई ने एक और ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसने पूरे शिक्षा तंत्र की पोल खोलकर रख दी है। सीबीआई की ताजा चार्जशीट में एक मामूली चाय की दुकान चलाने वाले शख्स की एंट्री हुई है, जिसने लाखों रुपये के लेनदेन के जरिए इस घोटाले को अंजाम देने में मदद की थी।
सीबीआई की जांच रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा प्रश्न पत्रों की कस्टडी और हैंडलिंग प्रोटोकॉल में बेहद घटिया स्तर की लापरवाही बरती गई थी। इसी खामी का फायदा उठाकर स्थानीय ऑपरेटर्स और बिचौलियों ने साठगांठ की। इसमें एक छोटा चाय वाला भी शामिल पाया गया, जिसने करीब 4.5 लाख रुपये के भारी-भरकम ऑफर के बदले पेपर लीक करने वाले गिरोह के वित्तीय लेनदेन और प्रश्नपत्रों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाई।
इस नए खुलासे के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और परीक्षा कराने वाली व्यवस्था पर एक बार फिर तीखे हमले शुरू हो गए हैं। जब एक चाय बेचने वाला देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा में सेंध लगा सकता है, तो यह स्पष्ट है कि इस पूरे नेक्सस की जड़ें कितनी गहरी हैं। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि सिर्फ छोटे मोहरों पर कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, जब तक पर्दे के पीछे बैठे बड़े आकाओं को बेनकाब नहीं किया जाता।
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