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पेंटागन की लाचारी और बगदाद का दो टूक फरमान

मध्य पूर्व के भूराजनीतिक नक्शे से अमेरिका के मुंह पर एक बहुत बड़ा तमाचा जड़ा गया है। इराक सरकार ने अल्टीमेटम देते हुए ऐलान कर दिया है कि अमेरिकी नेतृत्व वाली विदेशी गठबंधन सेना के लिए देश छोड़कर भागने की 30 सितंबर की डेडलाइन ‘अंतिम’ है। पेंटागन के जनरलों में इस अपमानजनक निकासी को लेकर भारी भगदड़ और खलबली मची हुई है।

दशकों तक इराक की छाती पर बंदूक रखकर अपनी धमक दिखाने वाले अमेरिका को आखिरकार अपना बोरिया-बिस्तर समेटना ही पड़ रहा है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने भी मान लिया है कि तय समय सीमा के भीतर उन्हें अपनी फौज और सैन्य साजो-सामान समेटकर बाहर निकलना होगा। यह वाशिंगटन के क्षेत्रीय वर्चस्व के ताबूत में आखिरी कील साबित हो रहा है।

अमेरिकी सैन्य अड्डे खाली और बदलता क्षेत्रीय समीकरण
बगदाद की सरकार पर घरेलू जनता और शक्तिशाली मिलिशिया समूहों का ऐसा खौफनाक दबाव था कि अमेरिका को घुटने टेकने पड़े।

इराकी हुक्मरानों ने साफ कर दिया है कि अब देश की माटी और सुरक्षा की हिफाजत केवल और केवल इराकी सेना ही करेगी।

अमेरिका के इस अचानक पलायन से पैदा होने वाले खतरनाक कूटनीतिक शून्य को भरने के लिए क्षेत्रीय ताकतें बेताब बैठी हैं।

क्या इराक से अमेरिकी फौजों की यह अपमानजनक विदाई इस देश को खून-खराबे से मुक्ति दिलाएगी, या फिर यह क्षेत्र एक नए और भीषण गृहयुद्ध की आग में भस्म हो जाएगा?

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