We want Justice, candle march- यंग जर्नालिस्ट अंशुल शर्मा की फेसबुक पोस्ट

We want Justice, candle march, और ये दिखा गुस्सा, आक्रोश बता कर क्या लेंगे हम… क्या इससे रेप पीड़िता को न्याय मिल जाएगा … पता हैं प्रोब्लम क्या हैं हमने ही लड़कियों को कामजोर बना रखा हैं.. यहां अकेले मत जाओ… एसे कपड़े मत पहनो….इतनी रात तक बाहर मत घुमो … अरे जानाब सोच अपनी बदलो …. लड़कीयों को बदलने से और उन्हे बांधने से कुछ नहीं होगा …. उन्हे मत बांधो … मैं लड़कीयो से भी कहती hu… किसी से भी अपेक्षा ना रखो के कोई मदद करेगा … खुद उठो अपने लिये लड़ो अपने लिये अपने अधिकारो के लिएे … candle जला कर नहीं रेपिस्टो को जला कर दम लो… इतना खौफ बना लो के कोई तुमको आँख उठा कर भी ना देखे … लेकिन अफसोस की बात तो ये हैं की हमें पुरूष के समान अपने अधिकार लेने के लिए भी लड़ना पड़ता हैं … जानते हैं क्यूँ … मैं बताती हूं …

समान अधिकार की बात सभी पुरूष वर्ग करते हैं पर समान अधिकार देने मैं डर लगता हैं… उनका ईगो हर्ट होता हैं जब उनकी बोस कोई लड़की हो… जब काम करवाने के लिये रोब में बोलती हैं … जब इनकी बीवी इनसे ऊँचे ओहदे पर रहती तो भी इनको दिक्कत होने लगती हैं …

कई पुरूष वर्ग के व्यक्ती का मत होता हैं की स्त्रियां घर संभालने के लिये हैं … बाहर की दुनिया में काम करना इनके बस का नहीं हैं .. इसीलिये ये लोग मौका नहीं देते … क्युकीं ये डरते हैं .. हमारी आजादी से …

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मैंने अक्सर देखा हैं की कोई लड़की काम समय में अच्छी जगह पहुँच कर काम कर रही … तो वो भी इन लोगो से देखा नहीं जाता … टेलेंट को ना देखते हुए… सीधे चरित्र पर पहुँच जाते हैं … हमारा चाल चरित्र कैसा हैं इसका भी ठेका इन पुरूष वर्ग के ठेकेदारो ने ले रखा हैं …

शराब सिगरेट सब पीती हैं …और ना जाने कितनो के साथ सोई भी होगी … समझ ही गये होंगे की किसी टायप की लड़की हैं …अरे मैं पूछना चाहती हूं …. की अगर कोई लड़की ये सब कर भी रही हैं तो आपको उस लड़की को चरित्रहीन साबित करने का अधिकार किसने दिया …

अब बात करते हैं हो रहे रेप पर …

कुछ लोगों का मानना हैं कि जो रेप हो रहे हैं… उसमे अधिकतर गलतियां लड़कियों की हैं … छोटे कपड़े पहनना … लड़को से दोस्ती कर देर रात तक घुमना … अपनी आजादी का गलत फायदा उठाना… इन शोर्ट अपनी मर्जी से जीना ही लड़कीयों के रेप का कारण…. मैं पूछती हूं जब यही काम लड़के करते हैं … तो उनके साथ कुछ गलत क्यूँ नहीं होता … वो 8 साल की मासूम आसिफा तो ऐसा कुछ भी नहीं कर रही थी फिर क्यूँ उन दरिन्दो ने उस मासूम के ज़िस्म और आबरू को तार तार किया … अब क्यूँ चुप हैं वो लोग जो ये सब बोलते रहते हैं ….

अरे शर्म करो … ऐसी बातें करने वालों …. शर्म करो ….

-अंशुल

 

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