चीन हमला करेगा तो क्या होगा? ताइवान ने समुद्र तट पर दिखाया जवाब

ताइवान ने इस बार युद्धाभ्यास नहीं किया—उसने संभावित युद्ध का रिहर्सल किया है। 10 अगस्त को ताइवान ने Penghu द्वीपों पर संभावित चीनी हवाई हमले और समुद्री लैंडिंग को रोकने का वास्तविक युद्ध जैसा अभ्यास किया।
Reuters के मुताबिक Han Kuang अभ्यास में M60A3 टैंक, तोपें और एंटी-एयरक्राफ्ट गन तैनात की गईं। लक्ष्य था एक तेज दुश्मन लैंडिंग को रोकना और बहु-स्तरीय रक्षा तैयार करना।
लेकिन इस अभ्यास की सबसे चौंकाने वाली बात हथियार नहीं थी।
ताइवान ने पहली बार नागरिक आपातकाल की स्थिति में मोबाइल इंटरनेट की गति कम करने का अभ्यास भी किया। जरूरी सेवाओं जैसे आपातकालीन कॉल और ATM को इससे बाहर रखा गया।
Penghu इतना महत्वपूर्ण क्यों?
Penghu द्वीप ताइवान और चीन के बीच रणनीतिक क्षेत्र में स्थित हैं। ताइवान की सैन्य योजना में इन्हें संभावित शुरुआती हमले के अहम लक्ष्य के तौर पर देखा जाता है।
चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग से पीछे नहीं हटने की नीति रखता है। ताइवान इस दावे को स्वीकार नहीं करता।
यही दशकों पुराने तनाव का मूल है।
ताइवान अब किस युद्ध के लिए तैयार हो रहा है?
2026 का अभ्यास सिर्फ पारंपरिक युद्ध पर केंद्रित नहीं है।
- हवाई हमला
- समुद्री लैंडिंग
- साइबर व्यवधान
- संचार बाधित होना
- नागरिक व्यवस्था पर दबाव
- रिजर्व सैनिकों की तैनाती
AP के अनुसार इस साल के अभ्यास में 5,000 से ज्यादा रिजर्व सैनिकों को सक्रिय किया गया और 24 घंटे की रक्षा क्षमता तथा “ग्रे-जोन” गतिविधियों के खिलाफ तैयारी पर जोर दिया गया।
ताइवान ने 2027 के रक्षा बजट में 16 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी रखा है, जो पहली बार 1 ट्रिलियन ताइवानी डॉलर से अधिक होगा।
भारत के लिए इसका मतलब
ताइवान संकट सिर्फ चीन और ताइवान का मामला नहीं है। ताइवान सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का केंद्र है। यहां सैन्य संघर्ष हुआ तो इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, चिप्स और वैश्विक व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
भारत के लिए चीन के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा का महत्व और बढ़ जाएगा।



