नई जीडीपी गणना से बदल जाएगा भारत का आर्थिक सच

भारत सरकार जल्द ही देश की जीडीपी गणना के तरीके में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नई पद्धति के अनुसार 2022-23 को आधार वर्ष बनाया जाएगा और संशोधित आंकड़े 27 फरवरी को जारी किए जाएंगे। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे भारत की आर्थिक वृद्धि की तस्वीर बदल सकती है।
नई गणना प्रणाली में अर्थव्यवस्था की बदलती संरचना, उपभोग के नए पैटर्न और नए आंकड़ों को शामिल किया जाएगा। हाल ही में महंगाई मापने के तरीके में भी बदलाव किया गया था और अब जीडीपी गणना में भी बदलाव हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस संशोधन से पुराने वर्षों के आंकड़े भी बदले जाएंगे जिन्हें बैक सीरीज डेटा के रूप में जारी किया जाएगा। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि पिछले वर्षों में भारत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि कितनी रही।
यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और नई गणना से आर्थिक स्थिति का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा।



