गरियाबंद की महिलाओं ने बदली होली की तस्वीर, हर्बल गुलाल से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

रायपुर। रंगों के त्योहार होली को इस बार गरियाबंद जिले के ग्राम सढ़ौली की महिलाएं खास अंदाज में मना रही हैं। राखी महिला ग्राम संगठन की 10 सक्रिय महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। यह पहल न सिर्फ प्राकृतिक और सुरक्षित होली को बढ़ावा दे रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आमदनी का मजबूत जरिया भी बन रही है।
समूह की महिलाएं पलाश से पीला, चुकंदर से लाल और पालक के पत्तों से हरा रंग तैयार कर रही हैं। इन प्राकृतिक रंगों को मक्के की सूखी डंठल से प्राप्त अरारोट पाउडर में मिलाकर गुलाल बनाया जा रहा है। इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक तत्वों का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे यह त्वचा और सेहत के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
महिलाओं का कहना है कि पिछले वर्ष हर्बल गुलाल की मांग काफी अधिक रही थी। वर्ष 2025 में लगभग 30 हजार रुपये से ज्यादा की बिक्री हुई और करीब 10 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया गया। इस सफलता को देखते हुए इस बार उत्पादन पहले ही शुरू कर दिया गया है।
गुलाल बनाने में चुकंदर और गुलाब की पंखुड़ियों से गुलाबी, हल्दी और गेंदे के फूलों से पीला, पालक और मेहंदी की पत्तियों से हरा, अपराजिता के फूलों से नीला तथा टेसू के फूलों से लाल रंग तैयार किया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया पारंपरिक और पर्यावरण के अनुकूल है।
जिला प्रशासन के अधिकारियों ने भी महिलाओं के प्रयासों की सराहना की है। यह पहल महिला सशक्तिकरण, स्वावलंबन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है। ग्रामीण महिलाएं अब स्वरोजगार के माध्यम से अपनी अलग पहचान बना रही हैं और होली को सुरक्षित व प्राकृतिक बनाने का संदेश दे रही हैं।




