भारत का चाबहार मास्टरस्ट्रोक: अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच चाबहार पोर्ट पर भारत का पूर्ण नियंत्रण, ऊर्जा आपूर्ति और कनेक्टिविटी सुरक्षित

पश्चिम एशिया के महायुद्ध में जहां अमेरिका-इजरायल और ईरान एक-दूसरे का वजूद मिटाने पर तुले हैं, वहीं भारत ने रणनीतिक बिसात पर ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है जिसने अमेरिका और ईरान दोनों को भारत के आगे झुकने पर मजबूर कर दिया है। बीते 24 घंटों के महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, भारत ने ईरान के रणनीतिक चाबहार बंदरगाह के शाहिद बहेश्ती टर्मिनल के परिचालन में अपनी आक्रामक मौजूदगी को और मजबूत करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि इस बंदरगाह की सुरक्षा और संचालन में कोई हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले 24 घंटों में भारतीय पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) ने चाबहार पोर्ट के जरिए मध्य एशिया और रूस के लिए माल ढुलाई के एक नए रिकॉर्ड ब्लॉक की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ईरान ने भारत को आश्वासन दिया है कि अमेरिकी हमलों के बावजूद चाबहार में भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर और जहाजों की पूर्ण सुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी होगी। वहीं दूसरी ओर, वाशिंगटन ने भी भारत के कड़े कूटनीतिक रुख को देखते हुए चाबहार पोर्ट के संचालन से भारत को मिलने वाली छूट पर कोई रोक न लगाने का मन बना लिया है, क्योंकि अमेरिका जानता है कि अफगानिस्तान और मध्य एशिया में स्थिरता के लिए भारत की उपस्थिति अनिवार्य है।
भारत का यह कदम स्पष्ट दिखाता है कि संकट के समय में भी भारत अपनी रणनीतिक दूरदर्शिता के जरिए अपने रास्तों को सुरक्षित करना जानता है। जहां फारस की खाड़ी में तेल आपूर्ति का संकट गहराया हुआ है, वहीं भारत ने अपने विविधतापूर्ण ऊर्जा स्रोतों और चाबहार मार्ग के माध्यम से अपने राष्ट्रीय हितों की ढाल तैयार कर ली है।
भारत ने विश्व बिरादरी को यह सख्त संदेश दे दिया है कि वह अपने सामरिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है। चाबहार पर भारत का यह मजबूत नियंत्रण न केवल चीन के सीपेक (CPEC) और ग्वादर पोर्ट के मंसूबों को पानी-पानी करता है, बल्कि यह भी स्थापित करता है कि जब दुनिया बारूद के ढेर पर जल रही हो, तब भी भारत अपनी रणनीतिक समझ से वैश्विक व्यापार के नए रास्ते बनाने की क्षमता रखता है।




