अरब सागर में भारत की दादागिरी: महायुद्ध के बीच भारतीय नौसेना का अभेद्य सुरक्षा चक्र, दुश्मनों के होश फाख्ता

पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े महायुद्ध के बीच भारत ने अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी सैन्य ताकत का ऐसा प्रचंड प्रदर्शन किया है कि पूरी दुनिया दंग रह गई है। बीते 24 घंटों में भारतीय नौसेना ने अपने दो अग्रिम विमानवाहक पोतों (INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत) को अग्रिम पंक्तियों में तैनात करते हुए अरब सागर से गुजरने वाले भारत-संबद्ध व्यावसायिक जहाजों के लिए एक अभेद्य ‘सुरक्षा कॉरिडोर’ कायम कर दिया है। जहाँ पूरी दुनिया में तेल और मालवाहक जहाजों की आवाजाही ठप पड़ रही है, वहीं भारत ने अपनी संप्रभुता और ताकत के बल पर अपनी व्यापारिक लाइनों को शत-प्रतिशत सुरक्षित रखा है।
रक्षा मंत्रालय के उच्च सूत्रों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में फारस की खाड़ी से आ रहे भारतीय ध्वज वाले तीन बड़े तेल टैंकरों को भारतीय नौसेना की निर्देशित मिसाइल विध्वंसकों (Destroyers) और लंबी दूरी के P-8I समुद्री गश्ती विमानों ने पूर्ण सुरक्षा घेरा प्रदान कर सुरक्षित भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचाया। इसके साथ ही स्वदेशी ‘दृष्टि-10 स्टारलाइनर’ अनमैन्ड एरियल व्हीकल्स (UAVs) ने पूरे उत्तर-पश्चिमी अरब सागर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखते हुए किसी भी संभावित खतरे को पनपने से पहले ही बेअसर कर दिया।
भारत के इस आक्रामक और सक्षम रुख का संदेश बिल्कुल साफ है—हिंद महासागर का असली राजा भारत है। जब अमेरिका और ईरान की जंग के कारण पूरे विश्व में डर का माहौल है, तब भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह केवल अपनी सुरक्षा ही नहीं कर सकता, बल्कि क्षेत्रीय शांति और समुद्री स्थिरता का सबसे बड़ा स्तंभ (Net Security Provider) है।
भारतीय नौसेनाध्यक्ष ने कड़े शब्दों में संदेश दिया है कि भारतीय समुद्री सीमाओं या भारत के रणनीतिक व्यापारिक हितों की ओर आंख उठाने की हिमाकत करने वाले किसी भी गैर-राज्य या राज्य प्रायोजित तत्व को समुद्र की गहराई में दफना दिया जाएगा। भारत की इस त्वरित और शक्तिशाली सैन्य मुस्तैदी ने साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी आर्थिक और ऊर्जा प्राथमिकताओं से कोई समझौता नहीं करेगा, चाहे दुनिया में कितना भी बड़ा संकट क्यों न आ जाए।


