Major setback in Naxalism: 15 Naxalites, including a senior leader, surrender – is “Red Terror” over?

मिशन 31 मार्च 2026: क्या सिर्फ 3 दिन में खत्म हो जाएगा देश से ‘लाल आतंक’?

रायपुर। नक्सलवाद के खात्मे के इस ‘अंतिम अध्याय’ को देखने से पहले… अगर आप भी देश की सुरक्षा से जुड़ी सच्ची और बेबाक खबरें चाहते हैं, तो अभी ‘फोर्थ आई न्यूज़’ को सब्सक्राइब करें और इस वीडियो को लाइक करें।”

बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर… एक वक्त था जब इन जंगलों में सुरक्षाबलों का जाना मौत के मुंह में जाने जैसा था। लेकिन आज, खौफ का ये पूरा साम्राज्य ढह चुका है। सुरक्षा एजेंसियों की ‘टारगेटेड किलिंग’ और ‘सर्च ऑपरेशन्स’ ने नक्सलियों की कमर पूरी तरह तोड़ दी है।

हालत ये है कि नक्सल आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा माने जाने वाला ‘गणपति’ अपनी जान बचाने के लिए नेपाल भाग चुका है। उसका सबसे करीबी और खूंखार सहयोगी ‘मिशिर’ झारखंड की गुफाओं में छिपा बैठा है। और जो बचे हैं, उनका मनोबल इस कदर टूट चुका है कि लंबे समय से वॉन्टेड चल रहा मोस्ट-वांटेड नक्सली कमांडर ‘पापा राव’ आज अपने 18 साथियों के साथ सरकार के सामने घुटने टेक रहा है।

ये सिर्फ सरेंडर नहीं है, ये लाल आतंक के उस खौफनाक तंत्र का अंत है जो कभी सरकार को चुनौती देता था। खुफिया एजेंसियों ने गोली का जवाब गोली से दिया है। सरकारी आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि साल 2025 नक्सलियों के लिए ‘काल’ बनकर आया। इस दौरान संगठन को चलाने वाले सबसे बड़े 11 सेंट्रल कमिटी के सदस्य एक-एक करके एनकाउंटर में ढेर कर दिए गए।

सुधाकर, हिडमा, दामोदर, विकास, सुदर्शन, अनिल, रवि, मोहन, रमेश, शंकर… ये वो नाम थे जिनके इशारे पर खून-खराबा होता था, आज ये सब मिट्टी में मिल चुके हैं। अब तक 463 से ज्यादा नक्सली मारे जा चुके हैं, 1600 सलाखों के पीछे हैं और करीब 2500 ने मुख्यधारा में लौटने के लिए आत्मसमर्पण कर दिया है।

नक्सलवाद के इस खात्मे के पीछे सिर्फ बंदूक की गोली नहीं, बल्कि ‘विकास का बुल्डोजर’ भी है। जहां पहले बारूदी सुरंगे बिछी होती थीं, वहां आज पक्की सड़कें बन गई हैं। स्कूल खुल रहे हैं, अस्पताल बन रहे हैं और जो युवा कभी बंदूक उठाते थे, वो आज मुख्यधारा के रोजगार से जुड़ रहे हैं। सुरक्षाबलों ने गोलियों से ज्यादा स्थानीय आदिवासियों का ‘विश्वास’ जीता है, जिसने नक्सलियों का पूरा सूचना तंत्र (Intelligence Network) ही खत्म कर दिया। दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे कभी नक्सलवाद की राजधानी रहे जिलों में अब कोई बड़ा नक्सली लीडर बचा ही नहीं है।

लेकिन अब सारा फोकस सिर्फ एक तारीख पर है— 31 मार्च 2026। केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने की ये आखिरी डेडलाइन है। और इसमें सिर्फ 3 दिन बचे हैं। क्या इन 3 दिनों में देश आधिकारिक तौर पर ‘नक्सल मुक्त’ घोषित हो जाएगा? एक्सपर्ट्स का मानना है कि शीर्ष नेतृत्व के खत्म होने से नक्सलवाद अपने सबसे कमजोर दौर में है, लेकिन क्या बचे-खुचे कैडर्स कोई आखिरी और हताश पलटवार कर सकते हैं? सुरक्षाबलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस शांत पड़े ज्वालामुखी को पूरी तरह बुझाने की है, ताकि भविष्य में ये दोबारा कभी न सुलग सके। ये 3 दिन, देश के इतिहास के सबसे अहम दिन साबित होने वाले हैं।

आपको क्या लगता है, क्या वाकई 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया हो जाएगा? या ये लड़ाई अभी और लंबी चलेगी? कमेंट बॉक्स में अपनी राय हमें जरूर बताएं।

4rtheye web Desk
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