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जशपुर में बुजुर्गों के लिए ‘सियान गुड़ी’ की सौगात, डे-केयर सेंटर में मिलेगा सम्मान, देखभाल और नया उत्साह

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और देखभाल की दिशा में एक अहम पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर में अत्याधुनिक डे-केयर सेंटर ‘सियान गुड़ी’ का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने बुजुर्गों के साथ कैरम खेलकर न केवल उनका उत्साह बढ़ाया, बल्कि आत्मीय संवाद के जरिए उनके दिल भी जीत लिए। अपने बीच मुख्यमंत्री को पाकर वरिष्ठजन बेहद खुश नजर आए और इस पहल के लिए आभार जताया।

कार्यक्रम के दौरान बुजुर्गों को फूड बास्केट वितरित किए गए, साथ ही धार्मिक पुस्तक, शॉल और श्रीफल भेंटकर उनका सम्मान किया गया। इस दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि बदलते सामाजिक ढांचे—जैसे एकल परिवार, रोजगार के लिए पलायन और व्यस्त जीवनशैली—के कारण कई बुजुर्ग दिन में अकेलेपन और उपेक्षा का सामना कर रहे हैं, जिसका असर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

इन्हीं चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से ‘सियान गुड़ी’ डे-केयर सेंटर की परिकल्पना की गई है। यह केंद्र वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और सक्रिय वातावरण उपलब्ध कराएगा, जहां वे दिनभर समय बिताकर नई ऊर्जा और उत्साह प्राप्त कर सकेंगे।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इसे बुजुर्गों के जीवन को अधिक सम्मानजनक और खुशहाल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जो सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों को भी मजबूत करेगा।

जशपुर के रणजीता स्टेडियम के पीछे भागलपुर रोड स्थित यह केंद्र एक समग्र सुविधा युक्त डे-केयर यूनिट के रूप में विकसित किया गया है। यहां योग, प्राणायाम, मनोरंजन, सांस्कृतिक गतिविधियां, डिजिटल और वित्तीय साक्षरता, कौशल विकास प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं में प्राथमिक जांच, दवाएं, टेली कंसल्टेशन, फिजियोथैरेपी और जागरूकता सत्र भी शामिल हैं।

केंद्र में कानूनी और पारिवारिक परामर्श की सुविधा भी दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर नेशनल हेल्पलाइन 14567 और राज्य स्तरीय सियान हेल्पलाइन 155326 के जरिए तत्काल सहायता मिल सकेगी। आधुनिक सुविधाओं से लैस इस केंद्र में व्हीलचेयर सुविधा, दिव्यांग अनुकूल ढांचा, विशाल हॉल, पुस्तकालय, रीडिंग कॉर्नर, टीवी, सीसीटीवी, बायोमैट्रिक सिस्टम और टेलीमेडिसिन जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं।

यहां रोजाना 6 से 8 घंटे तक योग, व्यायाम, भोजन, स्वास्थ्य परीक्षण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, समूह चर्चा और जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे बुजुर्गों को सक्रिय और सामाजिक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।

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