भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने बताया कि समझौते के अधिकांश हिस्सों पर सहमति बन चुकी है और केवल कुछ जटिल मुद्दों पर बातचीत बाकी है। नई दिल्ली में 2 जून से दोनों देशों के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण दौर की वार्ता शुरू हो रही है।
यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई दे सकता है। भारत को उम्मीद है कि इससे आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। वहीं अमेरिका अपने उत्पादों और सेवाओं के लिए भारतीय बाजार में अधिक पहुंच चाहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह समझौता सफल रहता है तो आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार 500 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ सकता है। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी इस समझौते को लेकर उत्साहित हैं क्योंकि इससे निवेश माहौल बेहतर होने की संभावना है।
हाल के वर्षों में अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक संबंध भी मजबूत हुए हैं। रक्षा, प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग बढ़ा है। ऐसे में व्यापार समझौता केवल आर्थिक दस्तावेज नहीं बल्कि रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय भी माना जा रहा है।
हालांकि कृषि और टैरिफ से जुड़े कुछ मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। भारत अपने किसानों के हितों को सुरक्षित रखना चाहता है, जबकि अमेरिका बाजार पहुंच बढ़ाने की मांग कर रहा है। फिर भी दोनों पक्षों के बयानों से संकेत मिलते हैं कि समझौते की दिशा सकारात्मक है।






