कमजोर मानसून की आशंका से बढ़ी चिंता, कृषि और महंगाई पर पड़ सकता है असर

भारत में मानसून केवल मौसम नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। 2 जून 2026 को जारी विभिन्न रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि इस वर्ष मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। इस संभावना ने सरकार, किसानों और बाजारों की चिंता बढ़ा दी है।
मौसम विभाग के अनुसार केरल में मानसून के प्रवेश की स्थिति बन रही है, लेकिन पूरे सीजन में वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका जताई गई है। केंद्र सरकार ने भी संभावित चुनौतियों को देखते हुए फसल निगरानी और संकट प्रबंधन समूहों का गठन किया है।
भारत की लगभग आधी कृषि आज भी मानसून पर निर्भर है। यदि बारिश कम होती है तो धान, दाल और अन्य प्रमुख फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसका असर सीधे खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मानसून का असर केवल गांवों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे ग्रामीण मांग कमजोर हो सकती है, उद्योगों की बिक्री प्रभावित हो सकती है और आर्थिक विकास की रफ्तार पर भी असर पड़ सकता है।
सरकार ने राज्यों को वैकल्पिक फसल योजनाएं तैयार करने और जल संरक्षण उपायों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। आने वाले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि मानसून देश की अर्थव्यवस्था के लिए राहत लेकर आएगा या नई चुनौतियां खड़ी करेगा।



