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जिला सहकारी बैंक में डकैतों का राज ?, विधवा को भी नहीं छोड़ा

छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले से भ्रष्टाचार और अमानवीयता की एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे बैंकिंग सिस्टम को जनता की नजरों में गिरा दिया है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की निपनिया शाखा की महिला मैनेजर अनिता पांडेय का एक वीडियो सरेआम वायरल हो रहा है, जिसमें वह अपने मृत पति के खाते से हक का पैसा निकालने आई एक गरीब, बेसहारा विधवा महिला से रिश्वत की गड्डियां वसूल रही हैं। जिस कुर्सी पर बैठकर जनता की सेवा करनी थी, उस पर बैठकर यह अधिकारी एक लाचार परिवार की मजबूरी का सौदा कर रही हैं।

वायरल वीडियो

10 हजार की डिमांड, 5 हजार पर सौदा: यह बैंक है या डकैतों की गुफा?

निपनिया गांव की रहने वाली पीड़ित महिला खेलन बाई अपने मृत पति के खाते में जमा रकम को पाने के लिए महीनों से इस बैंक के चक्कर काट रही थीं। लेकिन कड़कती धूप और आंसुओं की इस मैनेजर के दिल पर कोई शिकन नहीं पड़ी। आरोप है कि मैनेजर साहिबा ने मृत पति के खाते की राशि जारी करने के बदले 10 हजार रुपये की मोटी घूस मांगी। जब पीड़ित ने हाथ-पैर जोड़े, तो सौदा 5 हजार रुपये पर तय हुआ। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे यह महिला अधिकारी दस्तावेजों पर साइन कराने के बाद हेकड़ी से कहती है, “पैसे निकालो बोल रही हूं, आगे पैसे जल्दी निकालो…” और पैसे अपनी जेब में रख लेती है। एक रोती हुई विधवा के हक के पैसों पर डाका डालने वाली इस क्रूर मानसिकता को समाज में रहने का कोई अधिकार नहीं है।

विधायक को घमंड भरा जवाब: “मैं बिहारी हूं… जो करना है कर लो”

इस घूसखोर अधिकारी की बदतमीजी और अहंकार की हद तो तब पार हो गई, जब स्थानीय भाटापारा विधायक इंद्र साव ने इस मामले और किसानों की शिकायतों को लेकर इनसे बात की। विधायक के मुताबिक, इस महिला अधिकारी ने बेहद शर्मनाक लहजे में कहा, “मैं बिहारी हूं… जो करना है कर लो” और फोन काट दिया। कोई अधिकारी इतना बेलगाम कैसे हो सकता है कि उसे न तो जनता का डर हो, न ही जन प्रतिनिधियों का? इस तरह की भाषा और अहंकार साफ दर्शाता है कि इस ब्रांच में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं और इसे किसी बड़े संरक्षण का भरोसा है।

तत्काल बर्खास्तगी और एफआईआर की मांग, सिर्फ जांच का ढोंग क्यों?

पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए जिला कलेक्टर के ‘जनदर्शन’ में खुद पहुंचकर पैसों के लेन-देन का पुख्ता वीडियो प्रशासन को सौंपा है, जिसके बाद बलौदाबाजार कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जांच के आदेश दिए हैं। लेकिन जनता अब इस ‘जांच-जांच’ के खेल से थक चुकी है। जब वीडियो में घूसखोरी सरेआम कैमरे पर कैद है, तो फिर निलंबन और जांच की औपचारिकता क्यों? ऐसी भ्रष्ट और अमानवीय अधिकारी अनीता पांडेय को तुरंत नौकरी से बर्खास्त (Terminate) किया जाना चाहिए और पुलिस को अमानत में खयानत और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत इन्हें सीधे जेल की सलाखों के पीछे भेजना चाहिए। यदि ऐसे नरपिशाचों पर त्वरित और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो गरीबों का सरकारी तंत्र से भरोसा उठ जाएगा।

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