जैव विविधता अनुसंधान में आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग, छात्रों को मिले शोध और करियर के नए अवसर

धमतरी जिले के कुरूद स्थित संत गुरु घासीदास शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में जैव विविधता अनुसंधान पर विशेष जागरूकता एवं प्रेरक व्याख्यान का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड और छत्तीसगढ़ राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को आधुनिक अनुसंधान तकनीकों से परिचित कराना और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में शोध के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में प्राणीशास्त्र (एम.एससी.) के विद्यार्थियों को ‘जैव विविधता अनुसंधान के विविध आयाम एवं भविष्य की संभावनाएं’ विषय पर विस्तार से जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध वन संपदा, आर्द्रभूमि, नदियों, पर्वतीय क्षेत्रों, वन्यजीवों, जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान के कारण जैव विविधता अनुसंधान के लिए बेहद महत्वपूर्ण राज्य है।
व्याख्यान के दौरान वन जैव विविधता, पक्षी एवं वन्यजीव अध्ययन, जलीय जैव विविधता, आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी, जैव संसाधन, पारंपरिक ज्ञान और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर शोध की व्यापक संभावनाओं पर चर्चा की गई। साथ ही विद्यार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों जैसे रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, जीपीएस, ड्रोन सर्वेक्षण, डीएनए बारकोडिंग, पर्यावरणीय डीएनए (ई-डीएनए), बायोइन्फॉर्मेटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग और डिजिटल डेटा विश्लेषण के उपयोग से अवगत कराया गया।
छात्रों को ग्लोबल बायोडायवर्सिटी इंफॉर्मेशन फैसिलिटी (GBIF) और आई-नेचुरलिस्ट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग की भी जानकारी दी गई, जिससे वे प्रजातियों की पहचान, डेटा संग्रह और जैव विविधता के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण को बेहतर ढंग से समझ सकें।
इसके अलावा शोध विषय के चयन, अनुसंधान प्रस्ताव तैयार करने, फील्ड सर्वेक्षण, नमूना संग्रह, डेटा विश्लेषण, शोध पत्र लेखन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन की प्रक्रिया पर भी विस्तृत मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में अनुसंधान के दौरान नैतिक मूल्यों के पालन और स्थानीय जैव विविधता तथा पारंपरिक ज्ञान को नीति निर्माण एवं संरक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।
संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों ने शोधवृत्ति, उच्च शिक्षा, आधुनिक अनुसंधान उपकरणों और करियर से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाब दिया। महाविद्यालय के प्राचार्य और प्राध्यापकों ने इस पहल को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम वैज्ञानिक सोच विकसित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता अनुसंधान के प्रति युवाओं को जागरूक बनाते हैं।




