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जशपुर में समृद्धि एम-कैड योजना से बदलेगी खेती की तस्वीर, 13 गांवों के किसानों को मिलेगी आधुनिक सिंचाई

जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड स्थित बगिया क्लस्टर में शुरू की गई समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना किसानों के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोल रही है। इसी कड़ी में ग्राम डोकड़ा में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय, छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में “किसानों के लिए समृद्धि की पाठशाला” का आयोजन किया गया, जहां किसानों को आधुनिक सिंचाई और जल प्रबंधन की तकनीकों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कौशल्या साय, कलेक्टर रोहित व्यास, जल शक्ति मंत्रालय के उप संचालक शुभम पटोरी, घनश्याम पटेल, जनप्रतिनिधि, 13 ग्राम पंचायतों के सरपंच, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए।

जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय ने कहा कि इस परियोजना से किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिससे वे खरीफ के साथ रबी और अन्य फसलों की खेती भी कर सकेंगे। इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में भी वृद्धि होगी। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच का परिणाम बताया।

कौशल्या साय ने किसानों और महिलाओं से योजना का अधिकतम लाभ लेने की अपील करते हुए कहा कि यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

कलेक्टर रोहित व्यास ने बताया कि परियोजना के तहत भूमिगत पाइपलाइन बिछाई जाएगी, जिससे भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी और किसानों की जमीन सुरक्षित रहेगी। साथ ही किसानों को आधुनिक सिंचाई प्रणाली की जानकारी देने के लिए मध्यप्रदेश के मोहनपुरा-कुंडलिया सिंचाई मॉडल का अध्ययन भ्रमण भी कराया गया है।

जल शक्ति मंत्रालय के उप संचालक शुभम पटोरी ने बताया कि योजना के तहत भूमिगत पाइपलाइन से खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा, जल प्रबंधन समितियां संचालन एवं रखरखाव करेंगी और वैज्ञानिक तरीके से आवश्यकता के अनुसार पानी का वितरण होगा। इससे किसान वर्षा पर निर्भर नहीं रहेंगे और साल में दो से तीन फसलें ले सकेंगे।

करीब 119 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में भारत सरकार ने 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इसके तहत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड और ढुढुडांड सहित 13 गांवों के 4,933 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली से जोड़ा जाएगा।

योजना में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति, प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क, SCADA और IoT जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। शुरुआती पांच वर्षों तक परियोजना का संचालन निर्माण एजेंसी करेगी, इसके बाद इसकी जिम्मेदारी जल उपभोक्ता समिति को सौंपी जाएगी, जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। इस योजना का लक्ष्य जल की प्रत्येक बूंद का वैज्ञानिक उपयोग कर कृषि उत्पादन और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि करना है।

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