सूरजपुर को मिली 5 नए आंगनबाड़ी केंद्रों की सौगात, मातृ-शिशु सेवाएं होंगी और मजबूत

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिला एवं बाल विकास सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक और अहम कदम उठाया गया है। महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से सूरजपुर जिले में पांच नए आंगनबाड़ी केंद्रों के युक्तियुक्तकरण और संचालन को मंजूरी मिल गई है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालनालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार भारत सरकार के दिशा-निर्देशों और राज्य शासन की स्वीकृति के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। इससे दूरस्थ और जरूरतमंद क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों को पोषण, स्वास्थ्य तथा पूर्व-प्राथमिक शिक्षा जैसी आवश्यक सेवाएं पहले से अधिक आसानी से मिल सकेंगी।
स्वीकृत नए आंगनबाड़ी केंद्र ओड़गी और भैयाथान परियोजनाओं के अंतर्गत डगमलापारा (चेंद्रा सेक्टर), भूंडा (मोहरसोप सेक्टर), झाड़ूडीह (चेंद्रा सेक्टर), पण्डोपारा (चेंद्रा सेक्टर) और बगईहापारा (दर्रीपारा सेक्टर) में संचालित किए जाएंगे। इन केंद्रों का चयन संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या, भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ पुराने आंगनबाड़ी केंद्रों का युक्तियुक्तकरण कर उन्हें अधिक आवश्यकता वाले क्षेत्रों में स्थानांतरित किया जाएगा, ताकि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और अधिक से अधिक हितग्राहियों तक सेवाएं प्रभावी ढंग से पहुंच सकें।
जिला प्रशासन और परियोजना अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी नए स्वीकृत केंद्रों का संचालन 60 दिनों के भीतर शुरू किया जाए। साथ ही पोषण ट्रैकर और आईसीडीएस पोर्टल पर आवश्यक अपडेट, कार्यकर्ता एवं सहायिका की नियुक्ति तथा भवन सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर बच्चे को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन नए केंद्रों के शुरू होने से दूरस्थ क्षेत्रों की माताओं और बच्चों को सीधा लाभ मिलेगा तथा कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई मजबूती मिलेगी।
नए केंद्रों की स्वीकृति के बाद सूरजपुर जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों की कुल संख्या बढ़कर 2086 हो जाएगी। यह फैसला ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक मातृ-शिशु कल्याण सेवाओं की पहुंच मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



