अमेरिका का आखिरी अल्टीमेटम! फारस की खाड़ी में परमाणु बेड़े तैनात, ईरान की घेराबंदी से दहला मिडिल ईस्ट

मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) की सरजमीं पर किसी भी वक्त तीसरे विश्वयुद्ध की चिंगारी भड़क सकती है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे सख्त और आक्रामक रुख अपनाते हुए फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में अपने परमाणु संचालित विमानवाहक पोतों और बी-52 बॉम्बर विमानों का जत्था तैनात कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ शब्दों में ईरान को चेतावनी दी है कि यदि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों की आवाजाही को रोकने की गुस्ताखी जारी रखी, तो इसके परिणाम तेहरान के वजूद को मिटा देने वाले होंगे। पेंटागन के सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेना को “तत्काल और विनाशकारी” सैन्य कार्रवाई के लिए रेड अलर्ट पर रखा गया है।
पिछले 24 घंटों के दौरान फारस की खाड़ी में जो तनाव बढ़ा है, उसने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की नाकेबंदी करने और अमेरिकी ड्रोन को निशाना बनाने के दावे के बाद वाशिंगटन ने स्पष्ट कर दिया है कि बातचीत का समय अब समाप्त हो चुका है। वाशिंगटन में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने गर्जना करते हुए कहा, “अमेरिका अपनी और अपने सहयोगियों की समुद्री सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। यदि ईरान शांति की भाषा नहीं समझता, तो उसे उस भाषा में जवाब दिया जाएगा जो उसकी सैन्य क्षमता को पूरी तरह पंगु बना देगी।” अमेरिका के इस आक्रामक रुख से पूरे मध्य पूर्व में भारी खलबली मच गई है और कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में जबर्दस्त उछाल देखा जा रहा है।
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इस बार महज रणनीतिक दबाव नहीं बना रहा, बल्कि वह ईरान के परमाणु ठिकानों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुख्य कमान केंद्रों को सीधे लक्षित करने की तैयारी में है। खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल रक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर दिया गया है। अमेरिका की इस महा-घेराबंदी ने तेहरान को बैकफुट पर ला दिया है, हालांकि ईरान के कट्टरपंथी धड़े भी पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका की इस सीधी ललकार ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया में शक्ति का संतुलन बनाने के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है। आने वाले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि फारस की खाड़ी में शांति बहाल होगी या बारूद का कोई भयानक धमाका पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लेगा।




