ईरान-अमेरिका फिर आमने-सामने! होर्मुज पर ट्रंप की दादागिरी से भारत की बढ़ी टेंशन, तेल के दाम ने मचाई खलबली

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका की ओर से ईरान पर दबाव बढ़ाया जा रहा है, जबकि तेहरान ने साफ संकेत दिया है कि बातचीत विफल होने की स्थिति में वह पूरी तरह आक्रामक सैन्य नीति अपना सकता है। सबसे बड़ा टकराव रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है।
इस संकट का सीधा असर भारत पर भी पड़ रहा है। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातकों में शामिल है और पश्चिम एशिया में किसी भी लंबे सैन्य टकराव से ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। 18 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने के बाद भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई।
रुपये पर भी दबाव बढ़ा है। Reuters के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार आठवें सत्र में विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया, जबकि रुपया करीब 95.68 प्रति डॉलर तक कमजोर हुआ।
भारत की नीति लगातार तनाव कम करने, संवाद और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर देने की रही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट पर भारत की चिंता और तनाव कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। भारत के लिए चुनौती साफ है—युद्ध जितना लंबा चलेगा, ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार पर उतना ही बड़ा दबाव बढ़ेगा।



