रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत की दोहरी परीक्षा, रूस को ईंधन भी और शांति की अपील भी

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का असर भारत की विदेश नीति और ऊर्जा संबंधों पर भी दिखाई दे रहा है। भारत लगातार युद्ध के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति पर जोर देता रहा है, लेकिन दूसरी ओर रूस के साथ उसका ऊर्जा और व्यापार संबंध भी मजबूत बना हुआ है।
हालिया रिपोर्ट के अनुसार भारत से भेजा गया कम से कम एक गैसोलीन कार्गो रूस के घरेलू बाजार में पहुंचा है। रूस में यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचने के बाद ईंधन की कमी की स्थिति बनी है और ऐसे में भारत से पेट्रोल की आपूर्ति सामने आई है।
भारत रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल भी खरीद रहा है। 2026 के जुलाई में रूसी तेल भारत के कुल तेल आयात का 50.83 प्रतिशत तक पहुंच गया था। रिपोर्ट के मुताबिक रूस से भारत का तेल आयात सालाना आधार पर 62.4 प्रतिशत बढ़ा था।
इसी दौरान भारत ने रूस से जुड़े घटनाक्रमों में अपने नागरिकों और भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी कड़ा रुख दिखाया है। जुलाई में रूसी हमले में चार भारतीयों की मौत के बाद भारत ने वरिष्ठ रूसी राजनयिक को तलब कर गंभीर चिंता जताई थी।
भारत के सामने चुनौती साफ है। उसे रूस के साथ अपने पुराने रणनीतिक और ऊर्जा संबंधों को बनाए रखना है, लेकिन युद्ध और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में अपने हितों की रक्षा भी करनी है।
नई दिल्ली का घोषित रुख युद्ध का विस्तार नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान का है।



